मुरादाबाद। शहर की चर्चित बेकरी यूनिट टेंप्टेशन फूड्स के खिलाफ खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों का मामला अब और गंभीर हो गया है। जांच में सैंपल फेल होने, निरीक्षण में लगातार खामियां मिलने और अब प्रशासनिक पत्र के सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई पर सवाल तेज हो गए हैं,खासतौर पर इस बात को लेकर कि आखिर बिक्री पर अब तक रोक क्यों नहीं लगाई गई।

आधिकारिक पत्र ने खोली पूरी परतें
24 अप्रैल 2026 को सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए आधिकारिक पत्र में पूरे मामले का विस्तृत उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, 3 मार्च 2026 को कांठ रोड स्थित टेंप्टेशन यूनिट पर छापे के दौरान 11 सैंपल लिए गए थे। मौके पर 10 किलो हल्दी पाउडर, 14 किलो लाल मिर्च, 3.5 किलो धनिया पाउडर समेत अन्य सामग्री को खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2011 के तहत सीज किया गया।
निरीक्षण में गंदगी और अव्यवस्था की पुष्टि
पत्र में साफ उल्लेख है कि निरीक्षण के दौरान यूनिट में अत्यधिक गंदगी, अस्वास्थ्यकर हालात और खाद्य पदार्थों के भंडारण में गंभीर लापरवाही पाई गई। स्थिति को देखते हुए बेकरी सेक्शन को तत्काल सील कर 15 दिन का सुधार नोटिस जारी किया गया था।
दोबारा निरीक्षण में भी खामियां
5 मार्च को जब दोबारा निरीक्षण किया गया, तब भी सुधार पूरी तरह संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बावजूद शर्तों के साथ संचालन की अनुमति दे दी गई। यहीं से विभागीय कार्रवाई पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
जांच रिपोर्ट में सैंपल फेल – तथ्य स्पष्ट
पत्र के मुताबिक लैब रिपोर्ट में यह 2 सैंपल –
- Mixed Herb Sprinkle (Cochin Spices, AB Mauri Brand)
- Orange Sugar Paste (Backers Villa Vizyon)
मानकों के विपरीत पाए गए। यह सीधे तौर पर उपभोक्ता स्वास्थ्य से खिलवाड़ की पुष्टि करता है।
नोटिस जारी, मुकदमे की तैयारी
विभाग ने संबंधित फर्म को नोटिस जारी कर 30 दिन का समय दिया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कोर्ट में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया भी पत्र में स्पष्ट रूप से दर्ज है।
सबसे बड़ा सवाल-आउटलेट्स अब भी खुले क्यों?
अब पूरे मामले में सबसे गंभीर और अहम प्रश्न यही है, कि जब फैक्ट्री स्तर पर सैंपल फेल हो चुके हैं, निरीक्षण में बार-बार खामियां सामने आ चुकी हैं और खुद विभागीय पत्र में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है, तो टेंप्टेशन के शहर भर और अन्य स्थलों में चल रहे सेल आउटलेट्स और दुकानों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
क्या विभाग सिर्फ नोटिस और कागजी प्रक्रिया तक सीमित है, या फिर उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
खाद्य सुरक्षा तंत्र पर उठे बड़े सवाल
यह मामला केवल एक यूनिट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे खाद्य सुरक्षा सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अगर इतनी गंभीर रिपोर्ट के बाद भी बिक्री जारी रहती है, तो आम जनता की सेहत की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
