पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर मचे घमासान ने नया मोड़ ले लिया है। विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। बागी विधायकों के अलग गुट बनाने के बाद अब टीएमसी के सांसदों के भी पार्टी नेतृत्व से नाराज होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
विधानसभा में बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने सांसदों की संभावित बगावत को लेकर पूछे गए सवाल पर साफ जवाब देने से बचते हुए कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है और आने वाले दिनों में हालात बदल सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के कई सांसद पार्टी नेतृत्व, खासकर अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि कुछ सांसद अलग गुट बनाने की तैयारी में हैं, जबकि कुछ के बीजेपी के संपर्क में होने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
उधर, पार्टी में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए ममता बनर्जी ने कोलकाता स्थित अपने कालीघाट आवास पर वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में संगठन को टूटने से बचाने और आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। बागी विधायकों को विधानसभा में मान्यता मिलने और नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिए जाने के बाद यह ममता बनर्जी की पहली बड़ी राजनीतिक बैठक है।
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि यदि असंतोष और बढ़ा तो टीएमसी को अपने संगठनात्मक ढांचे के साथ-साथ पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को बचाने की चुनौती का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति और टीएमसी दोनों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
