मुरादाबाद। शिक्षा के नाम पर चलने वाले संस्थानों की जिम्मेदारी केवल बच्चों को पढ़ाना ही नहीं, बल्कि अभिभावकों के भरोसे और उनके आर्थिक हितों का सम्मान करना भी है। लेकिन मुरादाबाद के कांठ रोड पर नई तहसील के समीप वासुदेव कॉम्प्लेक्स में संचालित SCHOLARS DEN कोचिंग संस्थान को लेकर सामने आ रहे आरोपों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों की शिकायतें फीस और कॉशन मनी की वापसी से जुड़ी हैं। ताजा मामला कंजरी सराय निवासी वासु गुप्ता का है, जो अपने दो बच्चों की कुल 20 हजार रुपये की कॉशन मनी वापस लेने के लिए संस्थान के चक्कर काटने का दावा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से उन्हें लगातार नई तारीख देकर टाला जा रहा है। शुक्रवार शाम भी जब वह रकम लेने पहुंचे तो कथित तौर पर उन्हें एक बार फिर इंतजार करने को कहा गया। आखिरकार परेशान होकर उन्होंने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस बुला ली।
तारीख पर तारीख, आखिर कब मिलेगी अभिभावक की रकम?
वासु गुप्ता के मुताबिक, उनके दोनों बच्चों ने कक्षा नौवीं, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई के दौरान इसी संस्थान से कोचिंग की थी। इस वर्ष मार्च में दोनों बच्चे संस्थान से पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बाहर चले गए। अभिभावक का कहना है कि वर्ष 2021 से दोनों बच्चों की ₹10-10 हजार की कॉशन मनी संस्थान के पास जमा है। बच्चों के संस्थान छोड़ने के बाद उन्होंने अपनी जमा रकम वापस लेने का प्रयास किया, लेकिन अब तक उन्हें रकम नहीं मिल सकी है।

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10 सितंबर को भरवाया फॉर्म, सितंबर के अंत तक भुगतान का दिया था आश्वासन
वासु गुप्ता ने बताया कि 10 सितंबर को जब वह अपनी कॉशन मनी वापस लेने के लिए SCHOLARS DEN कोचिंग संस्थान पहुंचे, तो वहां उनसे एक फॉर्म भरवाया गया। अभिभावक का कहना है कि इस फॉर्म को भरवाए जाने की रसीद भी उनके पास मौजूद है। उस समय उन्हें बताया गया था कि दस्तावेजों की जांच करने के बाद सितंबर के आखिर तक उनकी कॉशन मनी वापस कर दी जाएगी।
अभिभावक के अनुसार, सितंबर का महीना बीत जाने के बाद भी रकम नहीं मिली। इसके बाद वह लगातार संस्थान के चक्कर लगाते रहे, लेकिन हर बार उन्हें कथित तौर पर आजकल और बाद में आने की बात कहकर टाल दिया जाता है।
वासु गुप्ता का कहना है कि संस्थान की नियत में खोट है ऐसा होने महसूस होता है। उन्हें लग रहा है कि संस्थान का स्टाफ उन्हें मूर्ख बना रहा है।
सितंबर के अंत में बुलाया, अब अक्टूबर की नई तारीख का दावा
वासु गुप्ता ने बताया कि संस्थान की एक कर्मचारी ने उन्हें सितंबर के आखिर में कॉशन मनी लेने के लिए आने को कहा था। इसी भरोसे पर वह शुक्रवार शाम संस्थान पहुंचे। लेकिन उनके मुताबिक, वहां पहुंचने पर रकम देने के बजाय उन्हें अक्टूबर के अंत में दोबारा आने के लिए कहा गया।
लंबे समय से कथित तौर पर चल रही इस देरी के बाद नई तारीख मिलने से वह नाराज हो गए। उनका कहना है कि जब पहले ही रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया था, तो फिर बार-बार समय क्यों बढ़ाया जा रहा है? एक अभिभावक के लिए 20 हजार रुपये छोटी रकम नहीं होती। ऐसे में रकम की वापसी को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी रहना स्वाभाविक रूप से परेशानी बढ़ाता है।
संचालक संस्थान में मौजूद, फिर भी मुलाकात नहीं होने देने का आरोप
इस पूरे मामले में वासु गुप्ता ने संस्थान के संचालक विवेक ठाकुर से मुलाकात नहीं होने देने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार संचालक से सीधे बात करने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारियों ने उन्हें मिलने नहीं दिया। उनके अनुसार, स्टाफ की ओर से कहा जाता था कि विवेक ठाकुर हर किसी से नहीं मिलते हैं।
वासु गुप्ता का दावा है कि शुक्रवार को भी संचालक संस्थान के अंदर मौजूद थे। इसके बावजूद जब उन्होंने उनसे मिलने की इच्छा जताई तो कथित तौर पर उन्हें फिर मना कर दिया गया। यदि अभिभावक की रकम को लेकर कोई विवाद है, तो प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है कि वह शिकायत सुनकर स्थिति स्पष्ट करे। आखिरकार अभिभावक अपनी जमा रकम के संबंध में जवाब मांग रहा है, किसी पर एहसान नहीं।
112 पर कॉल के बाद पहुंची पुलिस, 20 अक्टूबर तक भुगतान का कथित आश्वासन
बार-बार टालमटोल से परेशान होकर वासु गुप्ता ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस बुला ली। उनके मुताबिक, पुलिस के पहुंचने के बाद कर्मचारियों से बातचीत हुई। इसके बाद उन्हें अक्टूबर के अंत के बजाय 20 अक्टूबर को कॉशन मनी लौटाने की बात कही गई।
वासु गुप्ता का आरोप है कि पुलिस के आने के बाद भी उन्हें तत्काल रकम नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 20 अक्टूबर तक वास्तव में रकम वापस कर दी जाएगी, या अभिभावक को एक और तारीख का इंतजार करना पड़ेगा?
तीन दिन पहले भी मंडलायुक्त से शिकायत, लाखों रुपये की फीस का मामला
SCHOLARS DEN कोचिंग संस्थान को लेकर ताजा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब तीन दिन पहले भी कुछ अभिभावकों ने संचालक पर लाखों रुपये की फीस वापस नहीं करने के आरोप लगाते हुए मंडलायुक्त संगीता सिंह से शिकायत की थी। शिकायतकर्ताओं ने अपनी रकम वापस दिलाने की मांग उठाई थी।
यदि अलग-अलग अभिभावक फीस और कॉशन मनी की वापसी को लेकर शिकायतें कर रहे हैं, तो यह संबंधित अधिकारियों के लिए जांच का विषय होना चाहिए। शिकायतों की वास्तविकता, भुगतान के रिकॉर्ड, संस्थान की फीस और कॉशन मनी संबंधी शर्तों तथा प्रबंधन के जवाब की निष्पक्ष जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
यह मामला केवल एक अभिभावक के 20 हजार रुपये तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि शिक्षण संस्थानों में जमा रकम की वापसी के लिए अभिभावकों को कितनी पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध है।
यदि संस्थान के खिलाफ कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तो संबंधित अधिकारियों को शिकायतों की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनका परीक्षण करना चाहिए। अभिभावकों को उनकी जमा रकम के संबंध में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए और किसी भी विवाद का निस्तारण नियमों के अनुसार होना चाहिए।
अब जवाबदेही जरूरी, अभिभावकों को कब तक करना होगा इंतजार?
वासु गुप्ता का कहना है कि उन्हें अब संस्थान से अपनी कॉशन मनी वापस मिलने की उम्मीद भी कम रह गई है। उनका आरोप है कि लंबे समय से उन्हें आश्वासन देकर टाला जा रहा है। अब उनकी नजर 20 अक्टूबर की कथित भुगतान तिथि पर है।
प्रकरण में संस्थान का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है। पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा@शांतनु/INN
