अमरोहा, 09 अक्टूबर। ऐतिहासिक तिगरी गंगा मेले में प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए लग्जरी टेंट सिटी और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की तैयारियों के बीच किसानों व आम श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजकीय मेला घोषित होने के बावजूद बदहाली का आरोप लगाते हुए भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) ने वीआईपी संस्कृति समाप्त करने, किसानों को सम्मानजनक स्थान देने तथा तिगरी-गढ़मुक्तेश्वर को जोड़ने वाले प्रस्तावित पेंटून पुल के निर्माण पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले इस विशाल मेले में लगभग 35 से 40 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र को 22 सेक्टरों में बांटकर 125 अस्थायी घाट, प्रकाश, सुरक्षा और पार्किंग के इंतजाम शुरू किए हैं। वहीं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्विस कॉटेज, फूड कोर्ट और इंटरनेट सुविधाओं वाली टेंट सिटी प्रस्तावित की गई है, जिस पर किसान संगठनों का कहना है कि लग्जरी दावों के बीच आम किसानों को दलदली और धूलभरी जगहों पर ठहरना पड़ता है।
गेस्ट हाउस के अभाव, अंगूरी देवी धर्मशाला की जर्जर हालत और दुकानदारों से अधिक किराया वसूलने पर रोष जताते हुए संगठन ने समान अधिकार और पारंपरिक पहचान बहाल करने की मांग की। उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तिगरी और गढ़ गंगा मेले को जोड़ने के लिए घोषित पेंटून पुल के निर्माण को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि पीडब्ल्यूडी द्वारा अभी तक प्रयागराज से आवश्यक सामग्री न मंगाए जाने से इसके समय पर बनने पर संशय बना हुआ है।
शुक्रवार को अंगूरी देवी धर्मशाला में जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ ने सभी व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त करने के अधीनस्थों को कड़े निर्देश दिए हैं।
इस मौके पर प्रमुख रूप से संगठन के प्रमुख सचिव अरुण सिद्दू, वयोवृद्ध किसान नेता चौधरी चरणसिंह, प्रदेश अध्यक्ष इकबाल सैफी, चंद्रपाल सिंह, धर्मवीर सिंह, ओमपाल सिंह, एसके चौधरी समेत तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे@ब्यूरो/INN
