पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को हुए मतदान के बाद अब सभी की निगाहें 4 मई को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। नतीजों से पहले ईवीएम की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने एक सीसीटीवी फुटेज जारी कर स्ट्रॉन्ग रूम में रखी मतपेटियों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई है।
इस मुद्दे को लेकर कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में टीएमसी के वरिष्ठ नेता डॉ. शशि पांजा और कुणाल घोष धरने पर बैठ गए हैं। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सखावत मेमोरियल स्कूल पहुंचीं, जहां भवानीपुर समेत दक्षिण कोलकाता के विभिन्न बूथों की मतपेटियां रखी गई हैं।
टीएमसी ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) चुनाव आयोग के साथ मिलकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का दावा है कि उनकी गैरमौजूदगी में स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं। दूसरी ओर दुर्गापुर में भी स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने निगरानी तेज कर दी है।
इन आरोपों के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सभी गतिविधियां तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ही हो रही हैं और किसी तरह की अनियमितता नहीं है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉन्ग रूम और उसके आसपास हर समय स्थानीय पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियां तैनात रहती हैं, साथ ही सीसीटीवी के जरिए लगातार निगरानी की जाती है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, चुनाव से जुड़ी हर प्रक्रिया पूर्व निर्धारित नियमों और जिम्मेदारियों के आधार पर संचालित होती है। किस अधिकारी की क्या भूमिका होगी और किस एजेंसी को क्या कार्य करना है, यह पहले से तय रहता है और उसी के अनुसार सभी कदम उठाए जाते हैं।
चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के तहत ऑब्जर्वर्स पूरे घटनाक्रम पर नजर रखते हैं, जबकि कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियां उनके निर्देशों के अनुसार काम करती हैं। इस बीच स्ट्रॉन्ग रूम से जुड़े एक वायरल वीडियो ने सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें कुछ लोगों की मौजूदगी पर संदेह जताया जा रहा है।
इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग के पूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर मोहम्मद अमीन ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि ऐसे मामलों में तथ्यों की जांच जरूरी है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बहु-स्तरीय होती है, जिससे गड़बड़ी की संभावना काफी कम हो जाती है।
