अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। शुक्रवार को गजरौला पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से भारतीय किसान यूनियन (बी.आर. आंबेडकर) के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर मुआवजे, पुनर्वास और भविष्य की असुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल सीधे उनके सामने रखे।

गजरौला के दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे-09 स्थित एक होटल में हुई इस मुलाकात में डॉ. दिग्विजय भाटी के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि गंगा एक्सप्रेस-वे को भले ही विकास और ‘ग्रीन इकोनॉमी’ का प्रतीक बताया जा रहा हो, लेकिन जमीनी सच्चाई इसके ठीक उलट है। किसानों का आरोप है कि उनकी उपजाऊ जमीनों का तेजी से अधिग्रहण किया जा रहा है, जबकि बदले में दिया जा रहा मुआवजा बाजार मूल्य से काफी कम है, जो उनके लिए “आर्थिक मृत्युदंड” जैसा साबित हो रहा है।
हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के मंगरोला, रुस्तमपुर, गंगाटकोला और दौलतपुर जैसे गांवों से आए किसानों ने कहा कि जिस जमीन को वे अपनी जीवनरेखा मानते हैं, उसे औने-पौने दाम पर लेकर बड़े प्रोजेक्ट्स खड़े किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनका वर्तमान प्रभावित हो रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी असुरक्षित हो गया है।

किसानों ने प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से तीन प्रमुख मांगें रखीं :
- जमीन का संशोधित और न्यायसंगत मुआवजा
- प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
- कुल भूमि का 10 प्रतिशत आवासीय प्लॉट के रूप में आवंटन
इसके साथ ही, आंदोलन के दौरान किसान नेता डॉ. दिग्विजय भाटी पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग ने इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक व प्रशासनिक आयाम दे दिया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए Om Birla ने मौके पर ही एसडीएम मंडी धनौरा को तलब कर आवश्यक निर्देश दिए और किसानों को आश्वस्त किया कि उनके हितों की अनदेखी नहीं होगी। हालांकि, किसानों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई चाहिए।

किसानों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है, कि क्या गंगा एक्सप्रेस-वे वास्तव में उनके जीवन में समृद्धि लाएगा या फिर यह परियोजना खेती-किसानी को खत्म कर कुछ खास वर्गों के हितों तक ही सीमित रह जाएगी?
फिलहाल, कम मुआवजे और विस्थापन के डर ने अमरोहा के किसानों को आंदोलन की राह पर खड़ा कर दिया है। अब उनकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है—जहां उन्हें केवल वादों से नहीं, बल्कि न्याय से संतोष मिलेगा।
