पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद से ममता बनर्जी की सियासी मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़े स्तर पर टूट की अटकलें लगाई जा रही हैं। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। सूत्रों के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी को टीएमसी के 80 में से 59 से अधिक विधायकों का समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है।
सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रही नाराजगी अब खुलकर दिखाई देने लगी है। इसी बीच टीएमसी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी का बंगाल विधानसभा पहुंचना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि बागी गुट उन्हें विधानसभा में टीएमसी के नए नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
सूत्रों की मानें तो टीएमसी के करीब 20 विधायक भी विधानसभा पहुंचे, जिसे पार्टी के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
बताया जा रहा है कि सोमवार रात कोलकाता के विधायक हॉस्टल में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कई टीएमसी विधायकों के साथ बैठक की। इससे पहले भी ममता बनर्जी की एक अहम बैठक में बड़ी संख्या में विधायक शामिल नहीं हुए थे। अब उन्हीं विधायकों के साथ बागी नेताओं की मुलाकात ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।
बंगाल की सत्ता हाथ से निकलने के बाद टीएमसी के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। वहीं, अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर भी पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी की चर्चा है। ऐसे में आने वाले दिनों में टीएमसी की अंदरूनी राजनीति किस दिशा में जाती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
