मुरादाबाद। बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर मुरादाबाद में सरकारी योजनाओं का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर जिला प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए सितंबर 2023 से अब तक 45 बाल विवाह रुकवाए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से अप्रैल 2019 से अब तक जिले की 32,300 से अधिक बेटियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे हजारों परिवारों को बेटियों की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली है।
जिला प्रशासन के अनुसार, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस हेल्पलाइन 112, जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के संयुक्त प्रयासों से बाल विवाह की सूचना मिलते ही तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाया जाता है। इसके बाद बच्ची और उसके परिजनों की काउंसलिंग कर उन्हें बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जोड़कर बच्चियों की शिक्षा सुनिश्चित की जाती है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में कन्या सुमंगला योजना के तहत जिले को 10,200 लाभार्थियों का लक्ष्य मिला था, जिसके सापेक्ष 99.9 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि हासिल की जा चुकी है। योजना के अंतर्गत बेटी के जन्म से लेकर स्नातक या डिप्लोमा में प्रवेश तक छह चरणों में कुल 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है।
इसके अलावा, जिन बच्चों ने माता-पिता को खो दिया है, उन्हें उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 4,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता प्रदान की जा रही है। मुरादाबाद में अब तक 875 बच्चों को इस योजना का लाभ मिल चुका है।
जिला विद्यालय निरीक्षक रितु तोमर के अनुसार, सरकार की महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव विद्यालयों में भी देखने को मिला है। आर्थिक सहायता मिलने से गरीब परिवारों की बेटियां नियमित रूप से स्कूल पहुंच रही हैं और छात्राओं के ड्रॉपआउट में उल्लेखनीय कमी आई है।
योजना के लाभार्थियों ने भी इसे अपनी बेटियों के भविष्य के लिए बड़ी राहत बताया है। कई परिवारों का कहना है कि आर्थिक सहयोग मिलने से बच्चियों की पढ़ाई जारी रखना आसान हुआ है और कम उम्र में विवाह कराने का सामाजिक दबाव भी कम हुआ है। वहीं, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं का कहना है कि सरकारी सहायता ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है और अब वे डॉक्टर, शिक्षक तथा बैंक अधिकारी बनने जैसे अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा ने कहा कि कन्या सुमंगला और बाल सेवा जैसी योजनाएं बाल विवाह रोकने और बेटियों को सशक्त बनाने में प्रभावी साबित हो रही हैं। वहीं, संरक्षण अधिकारी शिवांगी शर्मा ने बताया कि टास्क फोर्स लगातार सक्रिय है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आर्थिक अभाव या सामाजिक दबाव के कारण किसी भी बच्ची का बचपन प्रभावित न हो। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले की प्रत्येक पात्र बच्ची को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और उसे शिक्षा के साथ सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराया जा सके@शांतनु/INN
