मुरादाबाद। वर्ष 2015 के बहुचर्चित योगेंद्र उर्फ भूरा हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी पंकज चौधरी की जमानत मंजूर कर ली है। करीब 11 वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद पंकज चौधरी को लंबी न्यायिक हिरासत, मुकदमे की धीमी सुनवाई और शीघ्र सुनवाई के अधिकार के आधार पर राहत मिली है।
भूरा हत्याकांड 23 फरवरी 2015 को मुरादाबाद की जिला अदालत परिसर में हुआ था। उस समय डिलारी ब्लॉक के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख योगेंद्र उर्फ भूरा को पेशी पर लाया गया था। कोर्ट परिसर के बाहर पुलिस अभिरक्षा के दौरान हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी थी। इस घटना से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी।
पुलिस ने घटना के तुरंत बाद पंकज चौधरी और उसके साथी सुमित चौधरी को मौके से गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि बाद में सुमित बदायूं जेल से फरार हो गया था, जिसे लगभग आठ वर्ष बाद यूपी एसटीएफ ने दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेजा।
जांच में सामने आया था कि सुमित चौधरी के बड़े भाई रिंकू चौधरी की हत्या का आरोप योगेंद्र उर्फ भूरा पर था। इसी रंजिश के चलते सुमित ने अपने साथी पंकज चौधरी के साथ मिलकर अदालत परिसर में वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में सुमित के पिता रामवीर सिंह और मामा नेपाल सहित अन्य आरोपियों को भी जेल भेजा गया था, जो बाद में जमानत पर रिहा हो चुके हैं।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि पंकज चौधरी 23 फरवरी 2015 से लगातार जेल में है और लगभग 11 वर्ष 6 माह की अवधि बीत चुकी है। मुकदमे में कुल 21 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल 13 गवाहों के ही बयान दर्ज हो सके हैं। ऐसे में मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि मुकदमे में देरी के लिए आरोपी जिम्मेदार है।
अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा गया कि संविधान द्वारा प्रदत्त स्पीडी ट्रायल का अधिकार प्रत्येक आरोपी का मौलिक अधिकार है। यदि मुकदमे में अत्यधिक विलंब होता है और आरोपी की ओर से देरी नहीं की गई है, तो गंभीर मामलों में भी जमानत पर विचार किया जा सकता है।
साथ ही बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि इस मुकदमे में अधिकांश सह-अभियुक्त पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं और पंकज चौधरी की भूमिका भी अभियोजन द्वारा सामान्य बताई गई है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पंकज चौधरी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
इस फैसले के बाद एक दशक से अधिक समय से लंबित इस चर्चित हत्याकांड की न्यायिक प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है। वहीं, मुकदमे की सुनवाई निचली अदालत में पूर्ववत जारी रहेगी@जफर/INN
