भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में राहत मिल गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए। साथ ही जिन घटनाओं का जिक्र किया गया था, उनसे जुड़े स्थान और दोनों पक्षों की मौजूदगी के रिकॉर्ड में भी मेल नहीं मिला। कोर्ट ने यह भी माना कि कुछ आरोप करीब 10 साल पुराने थे, जिससे उनके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके।
मामले के दौरान एक नाबालिग पहलवान ने अपने आरोप वापस ले लिए थे। वहीं दो अन्य महिला पहलवानों ने अदालत में अपने बयान दर्ज नहीं कराए। कोर्ट में कुल छह महिला पहलवानों की गवाही दर्ज हुई, लेकिन उपलब्ध सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोप साबित नहीं माने।
फैसले के बाद क्या बोले बृजभूषण?
कोर्ट से बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि शुरुआत से ही उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा था। उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि यदि मेरे खिलाफ एक भी आरोप साबित हो गया तो मैं खुद सबसे बड़ी सजा स्वीकार करूंगा। आज अदालत ने मुझे और विनोद तोमर को सम्मानपूर्वक बरी किया है।” उन्होंने अपने वकीलों और समर्थकों का भी आभार जताया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब देश की कई महिला पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हुए तत्कालीन WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। शिकायतों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था, जिसके बाद यह मामला अदालत में विचाराधीन रहा। अब राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
