नेपाल आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 175 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
बाढ़ के तेज बहाव ने नेपाल के परिवहन और संपर्क तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इसके अलावा 13 जलविद्युत परियोजनाएं भी बाढ़ की चपेट में आई हैं और कई वाहन तेज बहाव में बह गए।
राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाली सेना ने प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने के साथ बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकाला है। रसुवा के टिमुरे इलाके से 116 लोगों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं। एक सुरंग में फंसे 7 लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
बाढ़ के बाद नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास ने भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों के लिए इमरजेंसी संपर्क नंबर जारी किए हैं। दूतावास ने अपील की है कि नेपाल में फंसे या लापता लोगों से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक नंबरों पर WhatsApp के जरिए संपर्क किया जाए।
नेपाल की इस आपदा का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रशासन अलर्ट पर है। गंडक, नारायणी और कोसी समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर तथा बिहार के संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
बिहार के जल संसाधन विभाग के अनुसार फिलहाल राज्य में तटबंध सुरक्षित हैं और स्थिति नियंत्रण में है। अधिकारियों को नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
नेपाल में राहत, बचाव और लापता लोगों की तलाश का अभियान लगातार जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना और लापता लोगों का पता लगाना बनी हुई है।
