मुरादाबाद। ठाकुरद्वारा क्षेत्र में आदमखोर तेंदुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। खेतों और जंगलों तक सीमित रहने वाले तेंदुए अब ग्रामीण आबादी के बेहद करीब पहुंच गए हैं। ग्राम बलिया में शुक्रवार/शनिवार रात एक खौफनाक घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। घर के आंगन में सो रहे करीब 35 वर्षीय किसान जगराज सैनी को आदमखोर तेंदुआ उठा ले गया। सुबह ग्रामीणों को किसान का शव खेत में मिला तो पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई।
इस घटना के बाद बलिया समेत आसपास के गांवों में दहशत और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुओं की लगातार बढ़ती आवाजाही ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। अब स्थिति यह है कि लोग खेतों में जाने से ही नहीं, बल्कि अपने घरों के बाहर सोने से भी डरने लगे हैं।
आंगन में सो रहा था किसान, रात में तेंदुआ उठा ले गया
बताया गया कि ग्राम बलिया निवासी दिव्यांग जगराज सैनी (35) शनिवार रात अपने घर के आंगन में सो रहा था। रात के किसी पहर घात लगाए बैठे आदमखोर तेंदुए ने घर के आंगन में पहुंचकर किसान पर हमला कर दिया और उसे दबोचकर अपने साथ ले गया।
परिजनों को घटना की जानकारी होने पर गांव में हड़कंप मच गया। रात में ही ग्रामीणों ने किसान की तलाश शुरू की, लेकिन अंधेरा होने के कारण उसका कोई पता नहीं चल सका। सुबह ग्रामीणों ने आसपास के खेतों में तलाश की तो किसान का शव बरामद हुआ।
शव मिलने की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। ग्रामीणों में तेंदुए को लेकर भारी आक्रोश के साथ-साथ भय का माहौल है।
बलिया में तेंदुए के हमले से तीसरी मौत
ग्राम बलिया में तेंदुए के हमले से यह तीसरी मौत बताई जा रही है। लगातार हो रहे हमलों ने ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। इससे पहले भी तेंदुआ क्षेत्र में इंसानों को अपना शिकार बना चुका है। बहापुर बलिया गांव में पिछले 10 दिन में तेंदुआ 3 लोगों का खा चुका है। 18 अगस्त को इस गांव में खेत पर चारा लेने गई ब्रहम्मो देवी (52) की गर्दन दबोचकर तेंदुआ ईंख में ले गया था।
फिर 25 अगस्त को इसी गांव में धान के खेत की निराई कर रही सिपाही की मां मिथिलेश को तेंदुआ खा गया। अब फिर से इसी गांव में शुक्रवार रात जगराज को तेंदुआ घर से गर्दन दबोचकर सोते वक्त घसीट ले गया।
इसके अलावा लालापुर गांव में भी तेंदुए के हमले से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से साफ है कि ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुओं का खतरा अब सामान्य वन्यजीव गतिविधि तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण आबादी के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
खेतों से निकलकर घरों तक पहुंच रहे तेंदुए
ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ समय से क्षेत्र में तेंदुओं की गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। पहले तेंदुए खेतों और गन्ने के जंगलों में दिखाई देते थे, लेकिन अब वे गांवों की आबादी तक पहुंचने लगे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि तेंदुए रात के समय घरों के आसपास तक पहुंच रहे हैं। बलिया की घटना ने ग्रामीणों के इस डर को और गहरा कर दिया है कि यदि घर का आंगन भी सुरक्षित नहीं है तो आखिर वे कहां जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। बच्चे बाहर निकलने से डर रहे हैं और महिलाएं भी अकेले घर से बाहर जाने में भय महसूस कर रही हैं। किसानों के सामने अलग संकट है, क्योंकि खेती के काम के लिए उन्हें खेतों तक जाना ही पड़ता है।
गन्ने के खेत बने तेंदुओं के लिए सुरक्षित ठिकाने
ठाकुरद्वारा क्षेत्र में बड़ी संख्या में गन्ने के खेत हैं। घनी फसल तेंदुओं को छिपने के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराती है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में तेंदुए गन्ने के खेतों में छिपे रहते हैं और रात होते ही आबादी की ओर निकल आते हैं।
यही वजह है कि खेतों में काम करने वाले किसान और ग्रामीण सबसे अधिक जोखिम में हैं। कई गांवों में लोगों ने रात के समय खेतों की ओर जाना लगभग बंद कर दिया है।
एक के बाद एक हमलों से ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
तेंदुए के हमलों में लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भी नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जाने और निगरानी किए जाने के बावजूद हमले रुक नहीं रहे हैं।
लोगों की मांग है कि क्षेत्र में तेंदुओं की तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाए। संवेदनशील गांवों में लगातार निगरानी की जाए और आबादी के आसपास सक्रिय तेंदुओं को जल्द से जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए।
अब घरों के बाहर सोने से भी डर रहे लोग
बलिया की घटना ने ग्रामीणों के सामने एक नया भय पैदा कर दिया है। गर्मी और उमस के कारण गांवों में कई लोग रात के समय घर के बाहर या आंगन में सोते हैं। लेकिन किसान जगराज सैनी के साथ हुई घटना के बाद ग्रामीणों को डर है कि खुले में सोना अब जानलेवा साबित हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेतों से लेकर घरों के आंगन तक तेंदुओं की दस्तक ने उनके जीवन को असुरक्षित कर दिया है। रात में कुत्तों के भौंकने या किसी तरह की आहट होने पर लोग घरों से बाहर निकलने के बजाय दरवाजे बंद कर लेते हैं।
वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती
ठाकुरद्वारा क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे तेंदुए के हमलों ने वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब आवश्यकता केवल तेंदुओं को पकड़ने की नहीं, बल्कि उनकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने और संवेदनशील गांवों को सुरक्षित करने की है।
ग्रामीण चाहते हैं कि तेंदुओं की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए, कैमरों और अन्य निगरानी साधनों का इस्तेमाल किया जाए तथा आबादी के आसपास विशेष सतर्कता बरती जाए।
ग्रामीणों का सवाल – कब थमेगा मौत का सिलसिला?
एक के बाद एक हो रहे हमलों ने ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इंसानी जान जाने का यह सिलसिला कब थमेगा। बलिया में जगराज सैनी की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तेंदुए खेतों से निकलकर घरों के आंगन तक पहुंचने लगे हैं और लोगों को उनके घरों में ही निशाना बनाया जा रहा है, तब सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।
फिलहाल जगराज सैनी की मौत के बाद बलिया और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीण रात के समय विशेष सतर्कता बरत रहे हैं और तेंदुए की तलाश तथा उसे पकड़ने के लिए वन विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं@जफर/INN
