मुरादाबाद। जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया के निर्देशों के अनुरूप जनपद के परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता को नई दिशा देने के लिए निरंतर नवाचारी एवं प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यालयों में केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षण तक सीमित न रहते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, रचनात्मक क्षमता, तार्किक सोच, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल, खेलकूद एवं पाठ्य-सहगामी गतिविधियों में सहभागिता को भी शिक्षण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। इसके साथ ही विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा बच्चों की प्रगति में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया जा रहा है।
उच्च प्राथमिक विद्यालय जैतिया सादुल्लापुर, विकासखंड मूंढापांडे में एसएमसी एवं अभिभावक संघ की बैठक के दौरान छात्र-छात्राओं के हॉलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड अभिभावकों के साथ साझा किए गए। अभिभावकों को बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनकी सह-शैक्षिक गतिविधियों, व्यवहारिक विकास, सहभागिता और अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। हॉलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड के माध्यम से अभिभावकों को अपने बच्चों की सीखने की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिल रहा है तथा वे बच्चों की शैक्षिक प्रगति में विद्यालय के साथ अधिक प्रभावी ढंग से सहभागी बन रहे हैं।

स्मार्ट क्लास और प्रयोगशालाओं से आसान हो रही पढ़ाई
बैठक के दौरान अभिभावकों को विद्यालय में उपलब्ध शैक्षिक संसाधनों एवं संचालित गतिविधियों से भी परिचित कराया गया। विद्यालय में स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय, विज्ञान एवं गणित प्रयोगशाला जैसी सुविधाओं का उपयोग विद्यार्थियों को विषयों को केवल पुस्तकीय रूप से पढ़ाने के बजाय उन्हें समझने, प्रयोग करने और व्यवहारिक रूप से सीखने के अवसर प्रदान करने के लिए किया जा रहा है।

‘लर्निंग बाय डूइंग’ के माध्यम से बच्चों को करके सीखने के अवसर दिए जा रहे हैं। विभिन्न शैक्षिक तकनीकों एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री के प्रभावी प्रयोग से जटिल विषयों को भी सरल, सहज एवं रुचिकर तरीके से समझाने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षण योजना के अनुसार कक्षा शिक्षण को व्यवस्थित किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की आवश्यकता पर ध्यान दिया जा सके।

‘मेरी त्रुटि, मेरी सीख’ से गलतियों को बनाया जा रहा सीखने का अवसर
विद्यालय में ‘मेरी त्रुटि, मेरी सीख’ जैसी अभिनव पहल के माध्यम से विद्यार्थियों की गलतियों को केवल सुधारने तक सीमित न रखते हुए उन्हें सीखने का अवसर बनाया जा रहा है। बच्चे अपनी त्रुटियों को पहचानकर उनमें सुधार करते हैं और सही उत्तर अथवा सही प्रक्रिया को समझने का प्रयास करते हैं। इससे विद्यार्थियों में अपनी गलतियों से सीखने, दोबारा प्रयास करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रवृत्ति विकसित हो रही है।

इसके अतिरिक्त गृहकार्य, पठन-पाठन, कहानी एवं कविता आधारित गतिविधियों तथा विभिन्न पाठ्य-सहगामी क्रियाकलापों को भी शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ा गया है, ताकि बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बनी रहे और वे कक्षा में सक्रिय रूप से भाग लें।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान
विद्यालय में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए उनकी उपलब्धियों को पहचानने और सम्मानित करने की पहल भी की गई है। विद्यालय में नियमित रूप से आने वाले तथा शैक्षिक उपलब्धि, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, पाठ्य-सहगामी क्रियाकलापों, मीना मंच, बाल संसद एवं ईको क्लब में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जा रहा है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. सचिन शुक्ला ने बताया कि इस पहल से बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होने के साथ-साथ बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिल रही है। विद्यालय में बच्चों की प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें मंच प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो रही है।
प्राथमिक विद्यालय मझरा मानपुर साबित में भी नवाचारों से मजबूत हो रही शिक्षा की नींव।
प्राथमिक विद्यालय मझरा मानपुर साबित, विकास क्षेत्र डिलारी में भी शैक्षिक गुणवत्ता एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न प्रभावी एवं नवाचारी प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यालय में बच्चों को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां वे बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सकें, गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले सकें और आनंद के साथ सीख सकें।

विद्यालय में खेल-खेल में शिक्षा, गतिविधि आधारित शिक्षण, शैक्षिक तकनीकों का प्रभावी प्रयोग, बच्चों की सक्रिय भागीदारी तथा घर जैसा आत्मीय वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शिक्षण प्रक्रिया में कहानी, कविता, संवाद, गतिविधियों और विभिन्न शिक्षण-अधिगम सामग्री का प्रयोग कर बच्चों को विषय से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जिलाधिकारी पहल के अंतर्गत ‘मेरी त्रुटि, मेरी सीख’ का सतत अभ्यास विद्यार्थियों में अपनी गलतियों को पहचानने और उनमें सुधार करने की आदत विकसित कर रहा है। नियमित पठन-पाठन के माध्यम से बच्चों की भाषा एवं पढ़ने की क्षमता को मजबूत किया जा रहा है, वहीं संदर्शिका के प्रभावी अनुप्रयोग से पाठ्यक्रम को व्यवस्थित एवं निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप पूरा कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।

कॉपियों की नियमित जांच और गृहकार्य की निगरानी
विद्यालय में छात्र-छात्राओं की कॉपियों की नियमित जांच की जा रही है। गृहकार्य की निगरानी के साथ-साथ विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति पर निरंतर ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षकों द्वारा बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को समझते हुए उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इससे बच्चों में नियमित अध्ययन की आदत विकसित होने के साथ उनकी शैक्षिक दक्षताओं में भी सुधार दिखाई दे रहा है।
विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति लगभग 95 प्रतिशत रहती है, जो विद्यालय के प्रति बच्चों एवं अभिभावकों के सकारात्मक जुड़ाव को दर्शाती है। विद्यार्थियों का शैक्षिक स्तर भी अत्यंत सराहनीय एवं उत्साहवर्धक है। विद्यालय का प्रयास है कि प्रत्येक बच्चा नियमित रूप से विद्यालय आए, कक्षा में सक्रिय रूप से भाग ले और अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर सीखने का अवसर प्राप्त करे।

अभिभावक-विद्यालय सहभागिता से मजबूत हो रहा शैक्षिक वातावरण
जनपद के परिषदीय विद्यालयों में किए जा रहे इन प्रयासों का एक महत्वपूर्ण पक्ष अभिभावकों की सहभागिता भी है। हॉलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों की प्रगति से अवगत कराने से उन्हें यह समझने में मदद मिल रही है कि उनके बच्चे किन क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है।
विद्यालयों में आयोजित एसएमसी एवं अभिभावक बैठकों को केवल औपचारिक बैठक तक सीमित न रखते हुए इन्हें विद्यालय की उपलब्धियों, बच्चों की प्रगति, शैक्षिक गतिविधियों एवं भविष्य की कार्ययोजना पर संवाद का मंच बनाया जा रहा है। इससे विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक एवं समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है।
विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा की ओर बढ़ते कदम
दोनों विद्यालयों में अपनाए जा रहे नवाचारी शिक्षण तौर-तरीके यह दर्शाते हैं कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा को अधिक रुचिकर, आनंददायी, व्यावहारिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। स्मार्ट क्लास से लेकर प्रयोगशाला तक, खेल-खेल में शिक्षा से लेकर ‘मेरी त्रुटि, मेरी सीख’ तक और हॉलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड से लेकर विद्यार्थियों के सम्मान तक—इन सभी प्रयासों का उद्देश्य बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना और उनकी प्रतिभा को उचित अवसर प्रदान करना है।
जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया के निर्देशों के अनुरूप जनपद में परिषदीय विद्यालयों को ऐसे सशक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जहां प्रत्येक बच्चे को सीखने, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। नवाचार आधारित शिक्षण, नियमित मूल्यांकन, अभिभावकों की सहभागिता और विद्यार्थियों के प्रोत्साहन की यह पहल निश्चित रूप से परिषदीय शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है@शांतनु/INN
