पश्चिम बंगाल में खड़गपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) और 2021 बैच की IPS अधिकारी बुशरा बानो के तबादले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस मामले को लेकर बीजेपी और पश्चिम बंगाल सरकार पर सवाल उठाए हैं।
विवाद की शुरुआत बुशरा बानो के एक वीडियो से हुई, जिसमें वह UPSC की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रोत्साहित करती नजर आई थीं। वीडियो की शुरुआत उन्होंने ‘अस्सलामुअलैकुम’ से की और अंत में ‘इंशाअल्लाह’ और ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि एक न्यूज चैनल ने वीडियो को सनसनीखेज तरीके से पेश किया, जिसके बाद महिला IPS अधिकारी को ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने उनका समर्थन करने के बजाय अगले ही दिन उनका तबादला कर दिया।
इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के BRICS सम्मेलन के दौरान मुस्लिम देशों के नेताओं से मुलाकात का जिक्र करते हुए भी पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ धार्मिक अभिवादन और कुछ शब्दों के इस्तेमाल की वजह से किसी महिला IPS अधिकारी का तबादला किया जाना उचित है।
शिकायत के बाद बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि बुशरा बानो के वीडियो को लेकर ‘हिंदू लीगल फंड’ नाम की वेबसाइट की ओर से पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पास शिकायत की गई थी। शिकायत में वीडियो में ‘अस्सलामुअलैकुम’, ‘इंशाअल्लाह’ और ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए गए थे। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा था कि वीडियो के अंत में ‘वंदे मातरम’ या ‘जय हिंद’ का इस्तेमाल नहीं किया गया।
इसके बाद बुशरा बानो का तबादला कर उन्हें राज्य सशस्त्र पुलिस में डिप्टी कमांडेंट की जिम्मेदारी दी गई। उनकी जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब बुशरा बानो का तबादला महज प्रशासनिक फैसला है या फिर वायरल वीडियो और उससे जुड़े विवाद का असर, इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस मामले में IPS अधिकारी के तबादले पर सवाल उठाए हैं और IPS Association की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किया है।
