मुरादाबाद। जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया के नेतृत्व में जनपद में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ विद्यालयों में शैक्षिक नवाचारों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विकास खंड बिलारी के प्राथमिक विद्यालय खरौवा में सहायक अध्यापक भगत सिंह एवं विद्यालय स्टाफ द्वारा किए जा रहे शैक्षिक नवाचार ने विद्यालय की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सत्र 2024-25 में विद्यालय में छात्र नामांकन, उपस्थिति एवं छात्रों के विद्यालय में ठहराव को लेकर विद्यालय परिवार चिंतित था। छात्र संख्या लगातार कम हो रही थी। प्रधानाध्यापक एवं समस्त स्टाफ द्वारा अभिभावकों, ग्राम प्रधान एवं गांव के संभ्रांत व्यक्तियों से लगातार संपर्क एवं संवाद कर बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन छात्र संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही थी।
ऐसे समय में सहायक अध्यापक भगत सिंह एवं विद्यालय स्टाफ ने बच्चों के लिए विद्यालय को अधिक आनंददायक, रचनात्मक एवं आकर्षक बनाने के उद्देश्य से विशेष शैक्षिक नवाचार की कार्ययोजना तैयार की। इसके अंतर्गत प्रार्थना सभा को संगीत वाद्य यंत्रों के साथ रोचक बनाया गया। वहीं पाठ्य-पुस्तकों में दी गई कहानियों को बच्चों द्वारा वेशभूषा सहित नाटकीय रूप में प्रस्तुत कराया जाने लगा।

इसके साथ ही कविताओं को केवल पढ़ने के बजाय बच्चों द्वारा हारमोनियम, ढोलक, ढपली, मंजीरा, गिटार आदि वाद्य यंत्रों के साथ संगीतबद्ध कर प्रस्तुत किया जाने लगा। विभिन्न गतिविधियों में बच्चों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई, जिससे उनमें सीखने के प्रति उत्साह और विद्यालय आने की रुचि बढ़ी।
इन गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव विद्यालय के वातावरण पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा। बच्चे खुशी-खुशी नाट्य मंचन, कविता प्रस्तुति एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों में सहभागिता करने लगे। विद्यालय उनके लिए केवल पढ़ाई का स्थान न रहकर सीखने, अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का आनंददायक केंद्र बन गया।

इस नवाचार का सबसे उल्लेखनीय परिणाम यह रहा कि विद्यालय में छात्र संख्या 87 से बढ़कर 154 हो गई। अर्थात विद्यालय में 67 विद्यार्थियों की वृद्धि हुई। साथ ही विद्यार्थियों की विद्यालय के प्रति रुचि, नियमित उपस्थिति एवं ठहराव में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।
सहायक अध्यापक भगत सिंह का यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि रचनात्मक एवं बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से विद्यालयों में बच्चों की रुचि बढ़ाने के साथ-साथ नामांकन और उपस्थिति को भी बेहतर किया जा सकता है। विद्यालय परिवार द्वारा इन गतिविधियों को निरंतर जारी रखा जा रहा है।

जिला प्रशासन द्वारा ऐसे प्रभावी शैक्षिक नवाचारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि जनपद के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आनंददायक एवं अनुभवात्मक शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके@शांतनु/INN
