मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल तो उठाती है, लेकिन अपने पुराने फैसलों और रिकॉर्ड पर चर्चा करने से बचती है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब इंडिया गठबंधन के नेता ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाने की तैयारी में हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गठबंधन के नेताओं को चाय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है, जहां आगे की रणनीति पर विचार किया जाना है।
पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस उनकी ईमानदारी की प्रशंसा करती थी, लेकिन 1999 में उन्हें लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस का टिकट दिया गया। गोयल ने सवाल उठाया कि क्या यह उन्हें पुरस्कृत करने जैसा नहीं था।
उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें वर्ष 2000 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। गोयल के मुताबिक, सेवानिवृत्ति के बाद गिल कांग्रेस में शामिल हुए, 2004 में राज्यसभा पहुंचे और 2008 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बने। उन्होंने इन घटनाओं को चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ कांग्रेस के व्यवहार पर सवाल उठाने का आधार बताया।
पीयूष गोयल ने केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी टीकाराम मीणा और रतन यू. केलकर का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारियों को बाद में राजनीतिक या प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया गया। केलकर के मामले में उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा मुख्य सचिव बनाए जाने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या ऐसी नियुक्तियां राजनीतिक हितों से प्रभावित होती हैं।
बीजेपी ने इन उदाहरणों के जरिए कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं। वहीं, ज्ञानेश कुमार को लेकर इंडिया गठबंधन की आगे की रणनीति और प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर अब राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
