अमरोहा, 15 अक्टूबर। गढ़मुक्तेश्वर-तिगरी गंगा मेले को राजकीय दर्जा मिलने के बाद इस बार तैयारियों के साथ व्यवस्थाओं की प्राथमिकता भी चर्चा में है। जिला प्रशासन जहां सुविधाएं समय से जुटाने में लगा है, वहीं भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) ने मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजकर मेले में वीआईपी संस्कृति खत्म करने और आम श्रद्धालुओं को प्राथमिकता देने की मांग की है। संगठन का सवाल है कि जिस मेले की पहचान गंगा स्नान को उमड़ने वाली भीड़ से है, वहां तट और मेला क्षेत्र की बहुमूल्य जगह का उपयोग सबसे पहले श्रद्धालुओं के लिए क्यों न हो।
भाकियू ने मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और उपजिलाधिकारियों सहित वरिष्ठ अधिकारियों के टेंट मेला क्षेत्र से बाहर लगाने और उनके कार्यालय कोतवाली में संचालित करने का सुझाव दिया है। उसकी दलील है कि इससे खाली हुई जगह आम श्रद्धालुओं के काम आएगी। संगठन ने राजकीय मेले की मुख्य जिम्मेदारी जिला पंचायत को सौंपने की मांग भी की है। यह संभव न हो तो जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और किसान संगठनों की संयुक्त समिति बनाकर सुधार के सुझाव लेने की पैरवी की गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों के टेंट की जगह मुख्य सदर गेट के दोनों ओर धूल से सुरक्षित, चारों ओर से ढका और फूल-पौधों से सजा खाद्य बाजार विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

मांगपत्र में गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और मेले की ऐतिहासिक स्मृतियों व धार्मिक परंपराओं को सहेजने के लिए हर वर्ष स्मारिका प्रकाशित करने की बात भी है। धनौरा विधायक राजीव तरारा ने भी कहा कि मेले का अस्तित्व आस्थावान श्रद्धालुओं से है, इसलिए प्रशासन की प्राथमिकता उनकी सुविधाएं होनी चाहिए।
उधर, प्रशासन ने 15 से 25 नवंबर तक प्रस्तावित राजकीय गंगा मेला तिगरी-2026 की तैयारियों की समीक्षा कर सभी विभागों को निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। 24 नवंबर के मुख्य स्नान पर्व पर 35 से 40 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। शासन से तैयारियों के लिए 5.50 करोड़ रुपये स्वीकृत होने की जानकारी दी गई है। सड़क, अस्थायी मार्ग, घाटों पर बैरिकेडिंग, पेयजल, बिजली, प्रकाश, स्वच्छता, अस्थायी शौचालय, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस, अग्निशमन और खोया-पाया केंद्र जैसी व्यवस्थाओं पर जोर है। लंबित निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी करने और लापरवाही या देरी पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मेले की असली परीक्षा तैयारियों की सूची पूरी होने से नहीं, बल्कि इस बात से होगी कि लाखों श्रद्धालुओं को घाटों तक पहुंचने, सुरक्षित आवागमन, स्वच्छता और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं कितनी सहजता से मिलती हैं। वीआईपी शिविरों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए स्थान की जरूरत अपनी जगह है, पर किसान संगठन की मांग ने उपलब्ध भूमि के उपयोग और प्राथमिकताओं पर बहस खड़ी कर दी है। अधिकारियों के टेंट बाहर लगाने या जिला पंचायत को मुख्य जिम्मेदारी सौंपने पर अभी कोई निर्णय पुष्ट नहीं है। अब निगाहें इस पर रहेंगी कि प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा को केंद्र में रखकर इन सुझावों पर क्या रुख अपनाता है@ब्यूरो/INN
