रामपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर जेल में पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात के बाद कई राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव के बयानों ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी। उन्होंने आजम खान के प्रति अपना समर्थन जताते हुए उनके परिवार के साथ हुए व्यवहार को लेकर सवाल उठाए और प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की।
अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान केवल पार्टी के वरिष्ठ नेता नहीं, बल्कि उनके दिल से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान और उनके परिवार को लंबे समय से कानूनी मामलों का सामना करना पड़ रहा है। सपा प्रमुख ने उम्मीद जताई कि उन्हें न्याय मिलेगा और सच्चाई सामने आएगी।
रामराज्य की अवधारणा पर उठाए सवाल
रामपुर पहुंचने के बाद अखिलेश यादव ने रामराज्य की अवधारणा को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रामपुर, जिसके नाम में ही राम है, वहां रामराज्य की भावना के साथ न्याय होना चाहिए। उनके मुताबिक, समाज में न्याय, सम्मान और समानता की स्थापना ही रामराज्य की मूल भावना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में इन मूल्यों की अनदेखी हो रही है।
आजम खान के समर्थन में खुलकर बोले अखिलेश
आजम खान से मुलाकात के बाद सपा प्रमुख ने कहा कि आजम खान से उनका रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक परिवार के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और आजम खान के परिवार को जिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा है, वे गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
अखिलेश यादव ने कानूनी मामलों को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों के पीछे राजनीतिक प्रतिशोध की भावना हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सच्चाई सामने आएगी।
पत्रकार के सवाल पर भी दी प्रतिक्रिया
आजम खान से मुलाकात में 11 महीने लगने को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि किस चैनल का प्रतिनिधि इस तरह का सवाल लेकर आया है, लेकिन सवाल पूछते समय कुछ मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उनकी इस प्रतिक्रिया ने राजनीतिक मुलाकातों के दौरान मीडिया की भूमिका, सवाल पूछने के तरीके और नेताओं की जवाबदेही को लेकर भी चर्चा को जन्म दिया।
ओवैसी की सक्रियता पर रामायण का संदर्भ
उत्तर प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता से जुड़े सवाल पर अखिलेश यादव ने रामायण का संदर्भ देते हुए टिप्पणी की। उन्होंने रावण और सीता माता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग लंबे समय से अपनी राजनीतिक भूमिका और पहचान को लेकर अलग-अलग रूप दिखाते रहे हैं। उनका यह बयान प्रदेश में बदलते राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी दलों की रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
भाजपा और विश्वविद्यालय के मुद्दे पर भी हमला
अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का उद्देश्य शिक्षा और भविष्य निर्माण से जुड़े संस्थानों को मजबूत करना है। उन्होंने जौहर विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि संस्थान को लेकर जिस तरह की परिस्थितियां बनी हैं, वे चिंताजनक हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान समाज के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे संस्थानों को लेकर राजनीतिक टकराव के बजाय शिक्षा, शोध और युवाओं के भविष्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग पर भी लगाए आरोप
सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष की चिंताएं बढ़ी हैं। उन्होंने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए। ये आरोप समाजवादी पार्टी की राजनीतिक आपत्तियों के रूप में सामने आए हैं; इनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और आयोग के पक्ष को भी देखना जरूरी है।
करीब एक घंटे चली मुलाकात
उपलब्ध विवरण के अनुसार, अखिलेश यादव हेलीकॉप्टर से रामपुर पहुंचे और जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बने हेलीपैड पर उतरे। इसके बाद वह कार से जेल पहुंचे, जहां उन्होंने आजम खान से मुलाकात की। आजम खान के बड़े बेटे अदीब आजम भी उनके साथ रामपुर पहुंचे थे, हालांकि वह जेल के भीतर नहीं गए।
जेल में मुलाकात के बाद अखिलेश यादव आजम खान के घर भी पहुंचे। वहां उन्होंने परिवार के सदस्यों से बातचीत की। इस दौरान आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा, बेटे अदीब आजम और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। हेलीपैड पर सपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने भी उनका स्वागत किया।
सियासी संदेश साफ, आगे की नजर न्यायिक प्रक्रिया पर
रामपुर का यह दौरा आजम खान के प्रति समाजवादी पार्टी के नेतृत्व के समर्थन को फिर सामने लाया है। अखिलेश यादव ने मुलाकात के जरिए पार्टी के वरिष्ठ नेता और उनके परिवार के साथ खड़े होने का संदेश दिया। साथ ही, रामराज्य, शिक्षा, चुनाव आयोग और राजनीतिक मुकदमों जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी पार्टी का रुख भी स्पष्ट किया।
अब इन बयानों के राजनीतिक असर के साथ-साथ आजम खान से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की दिशा पर भी निगाहें रहेंगी@जफर/INN
