यूट्यूबर एल्विश यादव अब नई मुश्किल में फंस गए हैं. ED ने पीएमएलए की स्पेशल कोर्ट में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. हालांकि, वो अकेले नहीं हैं, उनके साथ पंजाबी सिंगर फाजिलपुरिया पर भी एक्शन लिया गया है. इस दौरान चार्जशीट में चंडीगढ़ की कंपनी स्काई डिजिटल को भी दोषी बनाया गया है. यह भी सांपों के इस्तेमाल से जुड़ा हुआ मामला है. पहले भी कोबरा कांड को लेकर एल्विश यादव पर नोएडा में केस दर्ज हुआ था. हालांकि, अब एक और मुश्किल में फंसते नजर आ रहे हैं. जांच एजेंसी में खुलासा हुआ कि दोनों ने अपने वीडियो में सांप और इगुआना जैसे रिजर्व जंगली जानवरों का इस्तेमाल किया था, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन है.
ईडी जांच में खुलासा हुआ है कि फाजिलपुरिया के गाने “32 बोर” से 52 लाख रुपये की कमाई हुई थी. इसी रकम से बिजनौर में 3 एकड़ जमीन 50 लाख में खरीदी गई. एल्विश और फाजिलपुरिया के बैंक खातों से कुल 3 लाख रुपये, जबकि स्काई डिजिटल कंपनी के खाते से 2 लाख रुपये जब्त किए गए हैं. ईडी ने दोनों की करीब 55 लाख रुपये की संपत्ति भी अटैच की है.
यह मामला उस वीडियो से जुड़ा है, जिसमें एल्विश यादव और फाजिलपुरिया ने सांपों के साथ शूटिंग की थी. इसी मामले में पहले “कोबरा कांड” के तहत भी एल्विश यादव पर नोएडा में केस दर्ज हुआ था. यह केस गौरव गुप्ता नाम के एक व्यक्ति ने दर्ज कराया था. इस मामले में उनका भाई सौरभ गुप्ता गवाह भी था. दोनों भाइयों ने बाद में एल्विश यादव के समर्थकों पर उन्हें धमकाने का आरोप भी लगाया था.
एल्विश यादव और अन्य लोगों पर आरोप हैं कि एक पार्टी में सांप के जहर को नशे की तरह इस्तेमाल किया गया था. इसमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे. रेव पार्टी से जुड़े मामले में पिछले साल एल्विश यादव को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद से एल्विश लगातार सुर्खियों में रहे हैं. अधिकतर मौकों पर वह नकारात्मक कारणों से चर्चा में रहे हैं. हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कहा था कि एल्विश और सह-आरोपी के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ है. इसके अलावा उनके पास से कोई सांप, मादक पदार्थ या नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था. एल्विश यादव एक ‘‘जाने-माने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर’’ हैं जो टेलीविजन पर कई रियलिटी शो में दिख चुके हैं, ऐसे में प्राथमिकी में उनका नाम आने से ‘‘मीडिया का बहुत ध्यान’’ आकर्षित हुआ है. इसके बाद उनके खिलाफ कार्यवाही पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी.
