धमकी और तत्काल प्रशासनिक सक्रियता
सुबह लगभग 9:30 बजे मऊ पुलिस कंट्रोल रूम को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने दावा किया कि काशी एक्सप्रेस के एक कोच में शक्तिशाली बम रखा गया है। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। उस समय ट्रेन मऊ जंक्शन पहुंचने वाली थी, जिसे तुरंत प्लेटफॉर्म नंबर एक पर इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोका गया और पूरे स्टेशन परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
यात्रियों में अफरा-तफरी और रेस्क्यू
ट्रेन के रुकते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने मोर्चा संभाला। यात्रियों को बिना देरी किए ट्रेन से नीचे उतरने के निर्देश दिए गए, जिससे स्टेशन पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कड़ाके की ठंड के बावजूद छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ हजारों यात्री प्लेटफॉर्म और रेलवे ट्रैक के किनारे खड़े होकर घंटों तक अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहे।
सघन तलाशी और संदिग्ध बैग की बरामदगी
सूचना की गंभीरता को देखते हुए बम निरोधक दस्ते (BDS) और डॉग स्क्वायड को मौके पर बुलाया गया। सुरक्षा बलों ने ट्रेन की हर बोगी, टॉयलेट और इंजन की बारीकी से जांच की। इसी दौरान प्लेटफॉर्म पर एक लावारिस बैग मिलने से दहशत और बढ़ गई। विशेषज्ञों ने सावधानीपूर्वक बैग को घेरे में लिया और उसकी जांच की, लेकिन अंततः उसमें से केवल निजी सामान और कपड़े ही बरामद हुए।
अधिकारियों का बयान और होक्स कॉल की पुष्टि
मऊ के पुलिस अधीक्षक (SP) इलामारन जी ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि लगभग तीन घंटे तक चली गहन तलाशी के बाद ट्रेन में कोई भी विस्फोटक सामग्री नहीं मिली है। उन्होंने इसे एक ‘होक्स कॉल’ (झूठी अफवाह) करार दिया। दोपहर करीब 12:30 बजे ट्रेन को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर मुंबई के लिए रवाना किया गया, जिसके बाद यात्रियों और रेल प्रशासन ने राहत की सांस ली।
आरोपी की तलाश और कानूनी कार्रवाई
पुलिस की सर्विलांस और साइबर सेल की टीमें अब उस अज्ञात कॉलर की लोकेशन ट्रेस करने में जुटी हैं। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह कॉल किसी इंटरनेट कॉलिंग ऐप के जरिए की गई थी ताकि पहचान छुपाई जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाकर जनता में भय पैदा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
