आज मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को दिल्ली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) मुख्यालय के बाहर नए ‘समानता विनियम 2026’ के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। प्रदर्शनकारी छात्र और संगठन इन नियमों को “भेदभावपूर्ण” बताकर इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
- बीजेपी के भीतर विरोध: नए नियमों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर भी असंतोष बढ़ गया है। लखनऊ में पार्टी के 11 पदाधिकारियों ने इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए इस्तीफा दे दिया है। नोएडा में बीजेपी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी इसे “काला कानून” करार देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
- प्रदर्शन का कारण: सवर्ण (सामान्य वर्ग) समुदायों के छात्रों का आरोप है कि ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ में भेदभाव की परिभाषा केवल आरक्षित वर्गों (SC, ST, OBC) के संदर्भ में दी गई है, जिससे सामान्य वर्ग के खिलाफ झूठी शिकायतों और “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” (उल्टा भेदभाव) का खतरा बढ़ सकता है।
- सुरक्षा और घेराव: प्रदर्शनकारियों ने आज UGC मुख्यालय का शांतिपूर्ण घेराव करने का आह्वान किया है। स्थिति को देखते हुए आईटीओ (ITO) स्थित मुख्यालय के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
- अधिकारियों के इस्तीफे: राजनीतिक विरोध के अलावा प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इन नए नियमों के विरोध में अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
- कानूनी चुनौती: इन नियमों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है, जहाँ एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर इन्हें असंवैधानिक और समानता के अधिकार के खिलाफ बताया गया है।
