अमरोहा | गजरौला क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से फैल रहे ज़हरीले प्रदूषण के खिलाफ किसानों का सब्र टूट चुका है। शहबाजपुर डोर में पिछले 50 दिनों से जारी बेमियादी धरने के बावजूद जब प्रशासन और सरकार ने कोई सुध नहीं ली, तो रविवार को किसानों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा।

भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के बैनर तले किसानों ने जुबिलेंट इन्ग्रेविया समेत कई रासायनिक कारखानों के पुतले फूंककर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
रविवार को ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर भारी संख्या में किसान धरना स्थल पहुंचे। नारेबाजी, प्रदर्शन और प्रशासन के खिलाफ तीखा आक्रोश देखने को मिला। किसानों ने साफ शब्दों में चेताया कि जब तक प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन और तेज किया जाएगा।

गौरतलब है कि नाईपुरा गांव और आसपास के इलाकों में रासायनिक कारखानों के जहरीले अपशिष्टों ने भूजल, सुजमना ढाब झील से निकलने वाली बगद नदी, तालाबों और अन्य जलस्रोतों को पूरी तरह दूषित कर दिया है।

हैंडपंप और ट्यूबवेल से पीला, बदबूदार और केमिकल युक्त पानी निकल रहा है। इसके चलते ग्रामीणों में कैंसर जैसी घातक बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है। फसलें बर्बाद हो रही हैं, पशुधन बीमार पड़ रहा है और पूरा क्षेत्र गंभीर स्वास्थ्य संकट की चपेट में है।

किसान नेताओं ने इसे “विकास के नाम पर विनाश” करार दिया। उनका कहना है कि जब तक जल-जंगल-जमीन पर समाज का अधिकार था, तब जीवन सुरक्षित था, लेकिन तथाकथित विकास मॉडल की आड़ में कारखानों ने किसानों से सब कुछ छीन लिया।

किसानों ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पलायन रोकने के लिए पर्यावरण बचाने की बात करते हैं, लेकिन प्रदूषण से तबाही झेल रहे किसानों की 50 दिनों से कोई सुध क्यों नहीं ली गई?
आंदोलनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता के शिखर पर बैठकर जनता की आवाज़ को अनसुना करना खतरनाक है—या तो सम्मान से नीचे उतरना पड़ता है, या फिर लुढ़कना तय होता है।

भाकियू (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली, कांग्रेस नेता आसिम बिल्डर और शकील चौधरी ने अमेरिका ट्रेड डील को भी किसानों के लिए विनाशकारी बताया। उन्होंने तीखा सवाल किया—देश का नेतृत्व दिल्ली से होता है या वाशिंगटन से?

किसान नेताओं का आरोप है कि नाईपुरा जैसे गांवों को रासायनिक कारखानों ने रोजगार नहीं दिया, बल्कि सरकार और प्रशासन की शह पर उन्हें ज़हरीले प्रदूषण से तबाह कर दिया गया। चेतावनी दी गई कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि पूरा नेरेटिव सरकार के खिलाफ खड़ा होगा।
किसानों की प्रमुख मांगें हैं-
- जल-जंगल-जमीन का संरक्षण
- एमएसपी कानून की गारंटी
- किसान हित में आयात नीति
- प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों पर कठोर कार्रवाई

इस अवसर पर वरिष्ठ किसान नेता ज़ाकिर, शकील अहमद, चंद्रपाल सिंह, सोमपाल सिंह, सुरेश सिंह, ओमप्रकाश सिंह, होमपाल सिंह, सुरेन्द्र सिंह, प्रदीप कुमार, रोशन लाल, इस्लाम, समरपाल सिंह, रामशरण, मनोहर लाल, रघुवीर सिंह, मनदीप सिंह, सुधीर प्रधान, हेमंत कुमार, मंसूर अली, आसिफ हुसैन, जुबेर चौधरी, जुल्फिकार चौधरी, अशरफ चौधरी, कर्म चौधरी, दिनेश सैनी, बाबूराम, अशोक सिंह, रामप्रसाद सिंह सहित सैकड़ों महिलाएं, बच्चे और पुरुष मौजूद रहे।
