मुरादाबाद। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) के नाम पर अवैध वसूली करने वाला गैंग एक बार फिर सक्रिय हो गया है। कुछ समय तक शांत रहने के बाद अब यह गिरोह दोबारा शहर और आसपास के इलाकों में निर्माणाधीन साइटों को निशाना बना रहा है। आरोप है कि खुद को पत्रकार और एमडीए से जुड़ा बताकर कुछ युवक निर्माणकर्ताओं से हजारों रुपये की उगाही कर रहे हैं। मामले की शिकायत मिलने के बाद पाकबड़ा पुलिस जांच में जुट गई है।
सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में सामने आया है कि दो युवकों ने कम से कम तीन कंस्ट्रक्शन साइटों से अवैध वसूली की है। पीड़ितों का आरोप है कि युवकों ने निर्माण कार्य रुकवाने, एमडीए की कार्रवाई कराने और नोटिस जारी कराने का डर दिखाकर पैसों की मांग की।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह वही नेटवर्क बताया जा रहा है, जिस पर पहले भी एमडीए के कुछ जेई स्तर के कर्मचारियों से सांठगांठ कर अवैध उगाही करने के आरोप लग चुके हैं। चर्चा रही थी कि गिरोह के सदस्य बाकायदा निर्माण स्थलों पर पहुंचकर खुद को प्राधिकरण से जुड़ा बताकर नोटिस थमाने तक लगे थे। इतना ही नहीं, निर्माणकर्ताओं को सीलिंग और ध्वस्तीकरण की धमकी देकर मोटी रकम वसूली जाती थी। जानकारी मिली है कि इसी तर्ज पर शहर में कई तथाकथित पत्रकारों के गैंग काम कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पूर्व वीसी के कार्यकाल में पनपा यह वसूली तंत्र अब फिर से पैर पसारने लगा है। शहर में तेजी से बढ़ रहे निर्माण कार्यों को यह गैंग आसान कमाई का जरिया बना रहा है। कई निर्माणकर्ताओं का कहना है कि ऐसे लोग अचानक साइट पर पहुंचते हैं, नियमों का हवाला देते हैं और फिर “मामला सेट” कराने के नाम पर पैसों की मांग शुरू कर देते हैं।
इंस्पेक्टर पाकबड़ा के अनुसार इस मामले में सोशल मीडिया पर भी शिकायत की गई है। एक महिला निर्माणकर्ता ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि अरमान और राजेंद्र गुप्ता नाम के दो युवकों ने खुद को पत्रकार बताते हुए पैसों की डिमांड की। महिला समेत तीन अलग-अलग निर्माण स्थलों से इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं।
पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। कॉल डिटेल, साइट विजिट और शिकायतकर्ताओं के बयान के आधार पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। यदि आरोप सही पाए गए तो आरोपियों के खिलाफ रंगदारी, धोखाधड़ी और अवैध वसूली जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे प्रकरण ने एमडीए की कार्यप्रणाली और उसके कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर प्राधिकरण के नाम पर बार-बार वसूली करने वाले गिरोह कैसे सक्रिय हो जाते हैं? क्या बिना अंदरूनी संरक्षण के कोई गैंग निर्माण स्थलों पर पहुंचकर खुलेआम नोटिस और कार्रवाई की धमकी दे सकता है?
फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन शहर में चर्चा इस बात की है कि यदि समय रहते इस गिरोह पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो निर्माणकर्ताओं से अवैध वसूली का यह खेल फिर बड़े स्तर पर फैल सकता है।
