ऋषिकेश/मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित माइंड, ब्रेन एंड कॉन्शसनेस कॉन्फ्रेंस (MBCC-2026) में भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान परंपरा और सनातन चिंतन की सशक्त उपस्थिति देखने को मिली। 3 से 6 जून 2026 तक आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में चेतना, मस्तिष्क और संज्ञान जैसे जटिल विषयों पर वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं के प्रतिनिधियों ने गहन मंथन किया।

सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित विशेष पैनल चर्चा “कॉग्निशन एंड कॉन्शसनेस (संज्ञान एवं चेतना)” में निर्मल आश्रम ऋषिकेश की ओर से पूज्य संत बाबा जोध सिंह जी महाराज का नाम पैनल सदस्य के रूप में शामिल किया गया। इस अवसर पर निर्मल आश्रम का प्रतिनिधित्व महंत गुरबिन्दर सिंह जी ने किया और भारतीय अध्यात्म, साधना तथा सेवा पर आधारित दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

अपने संबोधन में महंत गुरबिन्दर सिंह जी ने कहा कि भारतीय ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्षों पूर्व चेतना के स्वरूप, मानव मन और आत्मानुभूति के विषय पर गहन शोध किया था। भारतीय ज्ञान परंपरा में चेतना को केवल बौद्धिक या दार्शनिक अवधारणा नहीं माना गया, बल्कि इसे साधना, आत्मचिंतन और अनुभव के माध्यम से समझने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान आज जिन प्रश्नों के उत्तर खोज रहा है, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा उनके अनेक आयामों पर पहले से ही गहन चिंतन प्रस्तुत कर चुकी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि विज्ञान और अध्यात्म को प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि परस्पर पूरक दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए। आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और आध्यात्मिक अनुभवों के बीच सार्थक संवाद स्थापित होने से मानव जीवन, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक संतुलन और वैश्विक कल्याण के नए आयाम खुल सकते हैं।

सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वानों और आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पैनल चर्चा में इस्कॉन, श्री सारदा मठ, चिन्मय मिशन, रामकृष्ण मिशन, आर्ट ऑफ लिविंग, बाउल परंपरा तथा निर्मल आश्रम सहित अनेक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने चेतना एवं संज्ञान के विविध पहलुओं पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन आईआईटी खड़गपुर की प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर रिचा चोपड़ा ने किया।
सम्मेलन के दौरान आयोजित विशेष सत्र “Ask Swāmi–Swāminī & Āśīrvacan” में भी महंत गुरबिन्दर सिंह जी ने सहभागिता करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक चिंतन के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व मानसिक तनाव, मूल्य संकट और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में भारतीय अध्यात्म की समावेशी एवं मानवीय दृष्टि विश्व समुदाय को नई दिशा दे सकती है।

निर्मल आश्रम परिवार ने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपनी सहभागिता को गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह केवल संस्थान का सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और प्राचीन ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का भी प्रतीक है। सम्मेलन में प्रस्तुत विचारों ने यह स्पष्ट किया कि चेतना और मानव मन के रहस्यों को समझने के लिए विज्ञान और अध्यात्म के बीच सहयोग भविष्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुका है।
इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों और प्रतिनिधियों ने भारतीय आध्यात्मिक विरासत की गहराई तथा उसके वैज्ञानिक पक्ष की सराहना करते हुए इसे वैश्विक संवाद का महत्वपूर्ण आधार बताया। MBCC-2026 में निर्मल आश्रम की सक्रिय भागीदारी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय आध्यात्मिक चिंतन की प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ करने का कार्य किया।
