भारत सरकार और टेलीग्राम के बीच चल रहे कानूनी विवाद में केंद्र सरकार ने अदालत में बड़ा दावा किया है। सरकार का कहना है कि टेलीग्राम आतंकवादी गतिविधियों, साइबर अपराधों और संगठित धोखाधड़ी के लिए सबसे आसान और सुविधाजनक प्लेटफॉर्म बन चुका है। मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में विस्तृत जवाब रजिस्ट्री में दाखिल किया जा चुका है और रिकॉर्ड पर आते ही आगे की सुनवाई शुरू होगी।
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि टेलीग्राम को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था। कंपनी की दलीलों और जांच के निष्कर्षों को रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। केंद्र के मुताबिक, इस मामले की समीक्षा कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति ने की थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या किसी एक व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए दूसरे के अधिकारों पर रोक लगाई जा सकती है। इस पर सरकार ने कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और टेलीग्राम को सुनवाई का अवसर भी दिया गया था।
सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि टेलीग्राम के कुछ फीचर्स सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती पैदा करते हैं। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ऐप का बैकडेटिंग फीचर विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि इससे संदेशों की तारीख और समय तक बदला जा सकता है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म पर बिना फोन नंबर सार्वजनिक किए चैटिंग की सुविधा होने से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
इसी बीच, हाल ही में हुए NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने एहतियातन टेलीग्राम पर एक सप्ताह का अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। फिलहाल भारत में इस ऐप की सेवाएं बंद हैं। देश में टेलीग्राम के करोड़ों उपयोगकर्ता हैं और कंपनी के सीईओ इस फैसले का लगातार विरोध कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो भारत में टेलीग्राम के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
