मुरादाबाद। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल निराश्रित गोवंश संरक्षण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्ट्रेट सभागार, मुरादाबाद में जिलाधिकारी डॉ राजेन्द्र पैंसिया की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई।
जनपद में वर्तमान में कुल 36 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं। इनमें 23 अस्थायी गो-आश्रय स्थल, 07 वृहद गो-संरक्षण केंद्र तथा 06 कान्हा गौशाला नगर निकायों द्वारा संचालित हैं। इन गो-आश्रय स्थलों की कुल धारण क्षमता 10,500 गोवंश है, जिसके सापेक्ष वर्तमान में 7,870 गोवंश संरक्षित हैं।

मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के भुगतान में तेजी के निर्देश।
बैठक में मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत भरण-पोषण धनराशि के भुगतान की समीक्षा की गई। माह जुलाई 2026 तक की फंड रिक्वेस्ट विकासखंड मुख्यालयों से प्राप्त होकर लखनऊ मुख्यालय प्रेषित की जा चुकी है। विकासखंड मूंढापांडे की गत तीन माह की फंड रिक्वेस्ट प्राप्त न होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उसे तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि फंड रिक्वेस्ट भेजते समय गोवंश की जियो-टैग फोटो का प्रत्येक माह सत्यापन कर निर्धारित समयसीमा में गो-आश्रय पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि जनपद की फंड रिक्वेस्ट समय से पोर्टल पर अपलोड हो सके।

गोचर भूमि पर हरा चारा उत्पादन पर जोर।
गो-आश्रय स्थलों से लिंक गोचर एवं चारागाह भूमि पर नेपियर घास सहित अन्य हरे चारे का उत्पादन कर संरक्षित गोवंश को नियमित रूप से हरा चारा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि मार्च 2026 में लिंक गोचर भूमि पर हरा चारा उत्पादन के लिए ₹22,000 प्रति हेक्टेयर की दर से ग्राम पंचायतों को धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
संबंधित ग्राम सचिवों को धनराशि का समुचित उपयोग सुनिश्चित करते हुए समायोजन बिल एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

गोचर एवं चारागाह भूमि को कब्जामुक्त कराने के निर्देश
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तहसील प्रशासन से समन्वय स्थापित कर जनपद में उपलब्ध खाली पड़ी गोचर, चारागाह एवं नवीन परती भूमि को शीघ्र कब्जामुक्त कराकर संबंधित ग्राम पंचायतों को हस्तगत कराया जाए तथा इन भूमि को गो-आश्रय स्थलों से मैप किया जाए।
सड़कों एवं खेतों में विचरण कर रहे निराश्रित गोवंश को प्राथमिकता के आधार पर अभियान चलाकर नजदीकी गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित कराने के भी निर्देश दिए गए।
संभावित बाढ़ को देखते हुए पहले से हों आवश्यक इंतजाम
जिलाधिकारी ने फाजलपुर, राजूपुर मिलक, कान्हा गौशाला उमरी कला सहित अन्य गो-आश्रय स्थलों में संभावित बाढ़ से बचाव के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सभी गो-आश्रय स्थलों में बीमार गोवंश को अलग रखने के लिए कैटल शेड के एक ओर आइसोलेशन वार्ड बनाने के भी निर्देश दिए।

गो-आश्रय स्थलों में एकत्रित गोबर से कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट खाद एवं गोबर गैस तैयार कर उनकी बिक्री के माध्यम से गौशालाओं की आय बढ़ाने पर जोर दिया। गोबर खाद का पृथक रजिस्टर बनाए रखने के निर्देश दिए।
गौशालाओं में अवस्थापना सुविधाएं सुदृढ़ करने पर जोर।
जिला पंचायत द्वारा रामूवाला शेखू, रनियाठेर अहरोला, फत्तेहपुर नत्था एवं सिरसाठाट स्थित चार गोशालाओं में अतिरिक्त शेड निर्माण, खड़ंजा, मिट्टी भराव, कैटल शेड मरम्मत तथा नाली निर्माण/मरम्मत जैसे अवस्थापना संबंधी कार्य कराने के निर्देश दिए।
वृहद गो-संरक्षण केंद्र राजूपुर मिलक एवं रायपुर बुजुर्ग में विद्युत कनेक्शन न होने के कारण क्षेत्र पंचायत निधि से विद्युत कनेक्शन कराने के निर्देश दिए।

इसके अतिरिक्त रानी नागल, सादकपुर खिचड़ी, नया मुजफ्फरपुर, ईलर, आलमपुर चौहान, चंगेरी एवं मैसूवाला स्थित गो-आश्रय स्थलों में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कैटल शेड/भूसा गोदाम तथा परिसर में खड़ंजा-नाली आदि कार्य कराने के निर्देश दिए।
बैठक में यह भी संज्ञान में आया कि वृहद गो-संरक्षण केंद्र मोहम्मदपुर मनसुख, गोशाला रनियाठेर अहरोला, गोशाला रानी नागल एवं गोशाला ईलर के संपर्क मार्ग कच्चे हैं, जो बारिश एवं जलभराव के दौरान आवागमन में बाधा उत्पन्न करते हैं। इन संपर्क मार्गों को पर्याप्त ऊंचा कर खड़ंजा लगवाने के निर्देश दिए गए, ताकि गोवंश के लिए चारा, भूसा एवं अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति निर्बाध रूप से हो सके।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सुश्री मृणाली अविनाश जोशी अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) श्रीमती संगीता गौतम के साथ साथ समस्त खंड विकास अधिकारी, पशुपालन विभाग के अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) तथा नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी उपस्थित रहे@शांतनु/INN
