चेक बाउंस के 7 मामलों में दोषी ठहराए गए अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत के निर्देश के बावजूद तय रकम का डिमांड ड्राफ्ट पेश नहीं करने पर बेंच ने उनके रवैये पर नाराजगी जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में राजपाल यादव को कम से कम 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने को कहा था, लेकिन सुनवाई के दौरान उनके वकील ने सिर्फ 50 लाख रुपये के ड्राफ्ट की कॉपी पेश की। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि जब 5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया गया था, तो केवल 50 लाख रुपये क्यों लाए गए।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि उनके आचरण से अदालत के प्रति सम्मान नजर नहीं आ रहा है। जस्टिस बागची ने यहां तक कहा कि “आपकी जगह जेल में है।”
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि राजपाल यादव के टालमटोल वाले रवैये को अब तक इसलिए नजरअंदाज किया जा रहा था ताकि शिकायतकर्ता को कुछ रकम मिल सके। हालांकि, अदालत ने उन्हें एक और मौका देते हुए मामले की अगली सुनवाई बुधवार को तय की है।
दरअसल, यह मामला 2010 का है। फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी को करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। बाद में रकम लौटाने के लिए दिए गए 7 चेक बाउंस हो गए।
इसके बाद कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया। ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में और सेशंस कोर्ट ने 2024 में राजपाल यादव को दोषी ठहराया। वहीं, 10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी 7 मामलों में उन्हें 3 महीने की जेल और कुल 1.35 करोड़ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को उन्हें जेल जाने से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके लिए 5 करोड़ रुपये कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने की शर्त रखी गई थी।
