संभल। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-पंजीकरण (डिजिटल रजिस्ट्री) व्यवस्था के विरोध में संभल बार एसोसिएशन ने बुधवार को तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने निबंधन कार्यालय के बाहर धरना देकर सरकार के निर्णय के खिलाफ आवाज बुलंद की और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित ज्ञापन भेजकर निजी संस्थाओं के माध्यम से दस्तावेजों का पंजीकरण कराने संबंधी प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की।

बार एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा दस्तावेजों के पंजीकरण का कार्य निजी एवं प्राइवेट संस्थाओं को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि इस व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश भर में लाखों अधिवक्ता, बैनामा लेखक, स्टांप विक्रेता और कंप्यूटर ऑपरेटर बेरोजगार हो जाएंगे।
रोजगार और पारंपरिक व्यवस्था पर संकट का दावा
ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान पंजीकरण व्यवस्था से जुड़े हजारों परिवार वर्षों से अपनी आजीविका चला रहे हैं। यदि निजी संस्थाओं के माध्यम से रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू होती है तो अधिवक्ताओं और अन्य संबंधित वर्गों का रोजगार प्रभावित होगा। बार एसोसिएशन ने इसे जनहित के बजाय रोजगार विरोधी कदम बताते हुए शासन से पुनर्विचार की मांग की।

सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चला धरना
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुधवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक निबंधन कार्यालय परिसर में अधिवक्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।

विरोध प्रदर्शन के चलते पूरे दिन न तो निबंधन कार्यालय में कोई दस्तावेज पंजीकृत हुआ और न ही कोई अन्य रजिस्ट्री संपन्न हुई। अधिवक्ताओं ने दावा किया कि आंदोलन को व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता और कार्यवाहक सचिव रामकिशन सिंह द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई कि निजी संस्थाओं द्वारा पंजीकरण कराए जाने संबंधी शासनादेश को जनहित में वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने से पहले अधिवक्ताओं एवं संबंधित वर्गों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी विचार करना चाहिए।
बड़ी संख्या में अधिवक्ता रहे मौजूद
धरना-प्रदर्शन में अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता एडवोकेट और कार्यवाहक सचिव रामकिशन सिंह एडवोकेट के अलावा राजीव कुमार मटनागर एडवोकेट, मनीष आर्य एडवोकेट, प्रमेश सिंह एडवोकेट, शकील अहमद एडवोकेट, परवेज़ हुसैन एडवोकेट, रविकुमार उर्फ रवि एडवोकेट, फैजल हक एडवोकेट, अरविंद सिंह एडवोकेट, रमपाल सिंह एडवोकेट, शरफुद्दीन महाराज एडवोकेट, गुलफत्तू गुप्ता एडवोकेट, मुशेश कुमार एडवोकेट, वीरेश कुमार गोयल एडवोकेट, सचिन चौहान एडवोकेट, जाफर हुसैन एडवोकेट, पंकज सिंह एडवोकेट, राजबहादुर सर्वोतमा एडवोकेट, जाहिर हुसैन एडवोकेट, अमित उपाध्याय एडवोकेट, सतपाल सिंह एडवोकेट, नितिन एडवोकेट, अजय कौशिक एडवोकेट, चरण सिंह एडवोकेट, लोकेश कुमार एडवोकेट, कौशल त्यागी एडवोकेट, मो. रियाज एडवोकेट, नवनीत यादव एडवोकेट, धर्मवीर सिंह एडवोकेट, देवी सिंह एडवोकेट, नीतू सिंह सैनी एडवोकेट, कपिल सैनी एडवोकेट, अशोक कुमार एडवोकेट, नरेंद्र कुमार एडवोकेट, रामसुंदर यादव एडवोकेट, शमसुद्दीन हुसैन एडवोकेट तथा मो. नईम एडवोकेट सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
इसके अतिरिक्त अधिवक्ता भवन एवं कैंटीन संघ के संजीव पाठक, प्रेम सिंह तथा शाहिद हुसैन भी आंदोलन में शामिल रहे।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने अधिवक्ताओं की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। अधिवक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल उनके पेशे की नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के भविष्य की है, जिनकी आजीविका पंजीकरण व्यवस्था से जुड़ी हुई है@शांतनु/INN
