उत्तर प्रदेश में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष दानिश अंसारी ने संकेत दिए हैं कि प्रदेश में भी मध्य प्रदेश की तर्ज पर नया वक्फ बोर्ड गठित किया जा सकता है। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
दानिश अंसारी का कहना है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम का उद्देश्य केवल बोर्ड की संरचना बदलना नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों के तहत बनने वाले बोर्ड में पिछड़े और पसमांदा मुस्लिम समाज, महिलाओं तथा अन्य वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। साथ ही कानून के अनुसार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी बोर्ड में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के नए प्रावधानों के अनुरूप मध्य प्रदेश में पहले ही नया वक्फ बोर्ड गठित किया जा चुका है और अन्य राज्यों में भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार किया जा रहा है। उनका दावा है कि इससे वक्फ संपत्तियों का बेहतर रखरखाव होगा, रिकॉर्ड व्यवस्थित होंगे और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
दानिश अंसारी ने यह भी कहा कि वक्फ संशोधन कानून के जरिए वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण, ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार करना, अवैध कब्जों की पहचान और हटाने की प्रक्रिया तेज करना, दस्तावेजों का व्यवस्थित रखरखाव तथा नियमित ऑडिट जैसे कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि इन सुधारों से वक्फ संपत्तियों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि बीजेपी जनता के मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का मुद्दा उछाल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रही है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत नया वक्फ बोर्ड गठित करने वाला पहला राज्य बन चुका है। वहां 10 सदस्यीय बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है। अब उत्तर प्रदेश में भी इसी मॉडल पर नए वक्फ बोर्ड के गठन की संभावनाओं पर मंथन जारी है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अभी अंतिम निर्णय का इंतजार है।
