दिल्ली-एनसीआर का सबसे विकसित और आधुनिक शहर माने जाने वाले नोएडा की तस्वीर मानसून की पहली तेज बारिश के साथ ही बदल गई। कुछ घंटों की बारिश ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम की कमजोरियां उजागर कर दीं। हर साल मॉनसून से पहले जलभराव रोकने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही कई इलाके पानी में डूब जाते हैं और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बारिश के बाद शहर की प्रमुख सड़कें और चौराहे जलमग्न हो गए। दफ्तर और स्कूल जाने वाले लोग घंटों ट्रैफिक जाम में फंसे रहे। कई जगहों पर सड़कें इतनी पानी से भर गईं कि वाहन रेंगते हुए निकलते दिखाई दिए, जबकि दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को घुटनों तक पानी में चलना पड़ा। शहर के कई हिस्सों में हालात ऐसे बन गए कि सामान्य आवाजाही भी मुश्किल हो गई।
सेक्टर-62, 63, 75, 82, 105, 122 और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन समेत कई इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति देखने को मिली। कई अंडरपास भी पानी से लबालब भर गए, जिसके कारण लोगों को रास्ता बदलना पड़ा। कुछ स्थानों पर वाहनों के इंजन बंद हो गए और लंबी कतारें लग गईं।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई हाईराइज सोसायटियों के बेसमेंट में भी पानी घुस गया। इससे पार्किंग में खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई, वहीं बिजली व्यवस्था और लिफ्ट संचालन को लेकर भी लोगों में चिंता रही। कई आवासीय परिसरों के पार्क और खुले क्षेत्र भी पानी से भर गए, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही प्रभावित हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलभराव की समस्या केवल अधिक बारिश का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वर्षों से चली आ रही योजनागत कमियां भी जिम्मेदार हैं। मॉनसून से पहले नालों की सफाई के दावों के बावजूद कई स्थानों पर गाद और कचरा समय पर नहीं हटाया जाता। अक्सर नालों से निकाली गई मिट्टी किनारों पर ही छोड़ दी जाती है, जो बारिश के साथ दोबारा नालों में पहुंचकर पानी के बहाव को रोक देती है।
इसके अलावा, तेजी से हो रहे शहरी विकास ने भी समस्या को बढ़ाया है। शहर में लगातार बढ़ते कंक्रीट निर्माण के कारण बारिश का पानी जमीन में समाने की बजाय सीधे सड़कों और कॉलोनियों में जमा हो जाता है। कई प्राकृतिक जलनिकासी मार्ग और पुराने तालाब भी समय के साथ खत्म हो चुके हैं, जिससे अतिरिक्त पानी निकलने का रास्ता सीमित हो गया है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि जिस आबादी को ध्यान में रखकर वर्षों पहले नोएडा का ड्रेनेज नेटवर्क तैयार किया गया था, आज शहर की आबादी उससे कई गुना अधिक हो चुकी है। नई हाईराइज सोसायटियों और बढ़ते शहरी विस्तार के मुकाबले ड्रेनेज और सीवरेज नेटवर्क का पर्याप्त विस्तार नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, प्लास्टिक और घरेलू कचरा भी नालों को जाम करने में बड़ी भूमिका निभाता है।
हर मानसून में दोहराई जाने वाली यह स्थिति अब शहरवासियों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। लोगों का कहना है कि केवल कागजी योजनाओं और दावों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। जब तक ड्रेनेज सिस्टम का आधुनिकीकरण, नियमित सफाई और दीर्घकालिक शहरी योजना पर गंभीरता से काम नहीं होगा, तब तक नोएडा में हर बारिश के साथ जलभराव की समस्या बनी रहेगी।
