मुरादाबाद। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) द्वारा सील किए गए स्कॉलर्स डेन कोचिंग संस्थान के “शीघ्र शुरू होने” के दावे एक बार फिर शहर में चर्चा का विषय बन गए हैं। सूत्रों के अनुसार, संस्थान के संचालक विवेक ठाकुर लगातार अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह संदेश प्रसारित कर रहे हैं कि कोचिंग जल्द ही पुनः संचालित होने लगेगी। दूसरी ओर, एमडीए अधिकारियों की ओर से सामने आई जानकारी इन दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
केवल नाप-जोख के लिए सील खोलने पर विचार
सूत्रों के मुताबिक, एमडीए उपाध्यक्ष का कहना है कि जिन भवनों को सील किया गया है, उनके कुछ स्वामियों ने केवल भवन की नाप-जोख कराने के उद्देश्य से सील अस्थायी रूप से खोलने का अनुरोध किया है। इसका मकसद भवन की कंपाउंडिंग के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करना है। अधिकारियों का कहना है कि इसे भवन संचालन की अनुमति समझना पूरी तरह गलत होगा।
कंपाउंडिंग से पहले नियमों का पालन अनिवार्य
जानकारों का कहना है कि किसी भी भवन की कंपाउंडिंग केवल आवेदन देने से नहीं हो जाती। इसके लिए स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप निर्माण, निर्धारित सेटबैक और विकास प्राधिकरण के सभी मानकों का पालन अनिवार्य है। यदि भवन नियमों के विपरीत निर्मित पाया जाता है, तो पहले आवश्यक तोड़फोड़ कर उसे मानकों के अनुरूप बनाया जाता है, उसके बाद ही कंपाउंडिंग पर विचार किया जाता है।
‘वॉल-टू-वॉल’ निर्माण पर उठ रहे सवाल
सूत्रों का दावा है कि जिस वासुदेव परिसर में स्कॉलर्स डेन संचालित था, वहां भवन का निर्माण कथित रूप से “वॉल-टू-वॉल” किया गया है और निर्धारित सेटबैक नहीं छोड़ा गया। ऐसी स्थिति में बिना आवश्यक संशोधन के भवन की कंपाउंडिंग आसान नहीं मानी जा रही।
भवन स्वामी के शपथ-पत्र से आया नया मोड़
सूत्रों के अनुसार, वासुदेव परिसर के स्वामी चिकित्सक द्वारा मुरादाबाद विकास प्राधिकरण में एक शपथ-पत्र दाखिल किया गया है। इसमें अनुरोध किया गया है कि भवन की सील केवल नाप-जोख और कंपाउंडिंग की प्रक्रिया पूरी करने के लिए खोली जाए। शपथ-पत्र में यह भी उल्लेख किए जाने की चर्चा है कि भविष्य में उक्त भवन में स्कॉलर्स डेन कोचिंग संस्थान संचालित नहीं होगा तथा लगभग दो माह पहले ही संस्थान के संचालक विवेक ठाकुर को भवन खाली करने का नोटिस दिया जा चुका है।
तीन माह के नोटिस का भी है प्रावधान
सूत्रों का कहना है कि भवन स्वामी और कोचिंग संचालक के बीच हुए अनुबंध में तीन माह का नोटिस देकर भवन खाली कराने का प्रावधान है। यदि यह जानकारी सही है, तो आने वाले कुछ दिनों में संस्थान को यह परिसर खाली करना ही है।
एमडीए की दो टूक चेतावनी
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि वासुदेव परिसर की सील केवल लगभग एक सप्ताह से दस दिन के लिए खोलने पर विचार किया जा रहा है, ताकि भवन स्वामी नाप-जोख कराकर कंपाउंडिंग के लिए आवेदन कर सकें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी कीमत पर वहां कोचिंग संस्थान का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। यदि वहां दोबारा कोचिंग संचालित होती पाई गई तो तत्काल भवन को पुनः सील कर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल आखिर किस आधार पर?
जब भवन की वैधानिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, कंपाउंडिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और भवन स्वामी द्वारा भी संस्थान का संचालन न कराने की बात किए जाने की चर्चा है, तब आखिर किस आधार पर छात्रों और अभिभावकों को “जल्द शुरू होने” का भरोसा दिया जा रहा है? क्या यह किसी आधिकारिक आदेश पर आधारित है या फिर केवल अभिभावकों और छात्रों का विश्वास बनाए रखने का प्रयास?
अब सभी की निगाहें एमडीए के अगले कदम पर
इस पूरे प्रकरण को लेकर महानगर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। अभिभावकों का एक वर्ग यह जानना चाहता है कि “जल्द खुलने” के दावों की वास्तविकता क्या है। अब सभी की निगाहें मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की आगामी कार्रवाई और आधिकारिक निर्णय पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे@शांतनु/INN
