मुरादाबाद। दशकों से अवैध और कच्ची शराब के काले कारोबार के लिए बदनाम भातू और हबूड़ा बस्तियां अब विकास, बदलाव और स्वाभिमान की नई इबारत लिख रही हैं। इन समुदायों के लगभग 600 परिवारों ने अब अपराध और नशे का अंधकारमय रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा का दामन थाम लिया है। प्रशासन, पुलिस और समाज कल्याण विभाग की पहल से इन बस्तियों के भीतर धधकने वाली शराब की भट्ठियां अब पूरी तरह शांत हो गई हैं। प्रशासन के सघन प्रयासों से यह बस्ती अब एक ‘आदर्श कॉलोनी’ (मॉडल कॉलोनी) बनेगी। सरकार और प्रशासन द्वारा इसे मॉडल कॉलोनी के रूप में विकसित करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
रोजगार, कौशल विकास और नई आजीविका
अपराध से दूर हुए युवाओं और परिवारों को आजीविका से जोड़ने के लिए प्रशासन ने रोजगार मेलों और कौशल विकास कैंप का आयोजन किया है। लोगों को बिजनेस और उद्यमी योजनाओं से अवगत कराया गया है। इसका असर यह है कि अब 120 से अधिक युवा ई-रिक्शा चलाकर सम्मान की रोटी कमा रहे हैं। 50 से अधिक व्यक्तियों ने प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी शुरू कर दी है, वहीं 50 से अधिक परिवारों को दुकान और ठेले के माध्यम से स्वरोजगार मिला है। इसके अलावा 110 लोग दिहाड़ी मजदूरी और 10 लोग सरकारी नौकरी जैसी मुख्यधारा से जुड़े हैं। कौशल विकास विभाग द्वारा लगाए गए शिविरों में 150 से अधिक युवाओं को पंजीकरण फॉर्म बांटे गए, जिनमें से 39 युवाओं ने कौशल प्रशिक्षण के लिए अपना पंजीकरण कराया है।
शिक्षा और खेलों से संवर रहा बचपन
बस्ती के बच्चों का भविष्य संवारने के लिए शिक्षा और खेलकूद पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शिक्षा को लेकर बस्ती में एक बेहद सकारात्मक क्रांति देखने को मिल रही है। बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण विभाग के प्रयासों से पिछले शैक्षणिक सत्र (2025-26) में 84 बच्चों का स्कूल में एडमिशन हुआ था। इसी सकारात्मक बदलाव को और तेज करते हुए, प्रशासन ने इस वर्ष (2026-27) 100 के पार बच्चों को एडमिशन दिलाने की एक खास रणनीति तैयार की है, जिसके तहत अब तक 80 बच्चों का सफलतापूर्वक पंजीकरण किया जा चुका है। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को खेलकूद, खेल सामग्री और स्वास्थ्य प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। 50 से अधिक बच्चों एवं युवाओं को खेल से जोड़ा गया है, जो नियमित रूप से स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं। क्रीड़ा विभाग ने फुटबॉल, क्रिकेट, बॉक्सिंग आदि के लिए करीब 150 बच्चों का पंजीकरण किया है और 90 बच्चों को स्पोर्ट्स किट (जूते/ट्रैक सूट) दिए जाएंगे।
स्वास्थ्य, कल्याणकारी योजनाएं और बुनियादी ढांचा
बस्ती में 600 परिवारों का डोर-टू-डोर सर्वे कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया है। चिकित्सा विभाग द्वारा लगाए गए 9 नि:शुल्क हेल्थ कैंप में 2969 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। अब तक 3544 लोगों की आयुष्मान आईडी और 1340 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं (कुल 3500 से अधिक लाभार्थी)। 0-5 वर्ष के 290 बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया गया है।
समाज कल्याण विभाग द्वारा 90 बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन, 125 को निराश्रित महिला पेंशन, 14 को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ और 10 बच्चियों को कन्या सुमंगला योजना का लाभ दिलाया गया है। 200 पात्र परिवारों को चिह्नित कर 81 पात्र गृहस्थी और 07 अंत्योदय राशन कार्ड बनाए गए हैं। बस्ती में खाली भूमि का सर्वे कर वहां आधुनिक पार्क और ओपन जिम बनाने का नक्शा तैयार किया गया है और जिन घरों में बिजली नहीं थी, उन्हें नए कनेक्शन और रास्तों पर स्ट्रीट लाइटें दी गई हैं।
सामुदायिक भागीदारी से सुनिश्चित हो रहा विकास
विकास कार्यों की समीक्षा और लोगों में जागरूकता बनाए रखने के लिए ‘भातू समुदाय उत्थान समिति’ का गठन किया गया है। इस समिति की प्रतिमाह नियमित बैठकें होती हैं, जिसमें कार्य प्रगति की समीक्षा की जाती है।
वर्जन
“मुरादाबाद की भातू और हबूड़ा बस्ती को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर एक ‘आदर्श कॉलोनी’ (मॉडल कॉलोनी) के रूप में विकसित किया जाएगा। यह एक सतत प्रक्रिया है, जिस पर प्रशासन पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रहा है। दशकों तक उपेक्षा और अपराध का दंश झेलने वाले इन परिवारों को सम्मानजनक जीवन देना, बच्चों को शिक्षा और खेल से जोड़ना तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य योजनाओं से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक हर विभाग मिलकर काम कर रहा है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भविष्य में यह बस्ती अपराध के लिए नहीं, बल्कि अपने सकारात्मक बदलाव और एक मॉडल सोसाइटी के रूप में पूरे देश में पहचानी जाए।” – डॉ. राजेंद्र पैंसिया, जिलाधिकारी, मुरादाबाद@शांतनु/INN
