सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है. अदालत ने वांगचुक की हिरासत के ग्राउंड्स की कॉपी उनकी पत्नी को न दिए जाने पर भी सवाल उठाए. अब इस मामले में मंगलवार को फिर से सुनवाई होगी.
सोनम वांगचुक की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, जब तक हमें वांगचुक को हिरासत में लिए जाने की कॉपी नहीं मिलती, तब तक हम बहस नहीं कर सकते. हम उनकी हिरासत को चुनौती देने के लिए बोर्ड के सामने एक प्रतिनिधित्व दायर करना चाहते हैं, जिसके लिए नोटिस की कॉपी चाहिए.
उन्होंने पत्नी गीतांजलि से मिलने की अनुमति और दवाइयां, कपड़े जैसी जरूरी चीजें प्रदान करने की मांग की. सिब्बल ने बताया कि वांगचुक गिरफ्तारी से पहले उपवास पर थे और उनके स्वास्थ्य की चिंता है.
सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने नोटिस स्वीकार करते हुए कहा, ‘हिरासत में लिए जाने का आधारों की कॉपी हिरासत में लिए गए व्यक्ति को दी जा चुकी है और उनके भाई से इंटरकॉम पर बात हुई है. उन्होंने कहा कि पत्नी को मिलने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन हाइप न बनाया जाए.’
इस पर सिब्बल ने SG के दावे का खंडन करते हुए कहा, ‘हमें कोई कॉपी नहीं दी गई है. उनके भाई डिटेंशन सेंटर में उनसे मिले थे, लेकिन इंटरकॉम पर बात की. पारिवारिक सदस्यों को डिटेंशन के ग्राउंड्स की कॉपी दी जानी चाहिए, ताकि हम बोर्ड के सामने प्रतिनिधित्व पेश कर सकें.’ इस पर SG ने नोटिस स्वीकार कर लिया.
कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि पत्नी को आधारों की कॉपी क्यों नहीं दी जा रही. इस पर सॉलिसिटर ने कहा कि कानून में डिटेन्यू को सेवा देना जरूरी है और वह किया गया है. हम उन्हें चुनौती देने के लिए नए आधार नहीं देना चाहते कि परिवार को सेवा नहीं दी गई थी. कोर्ट ने सरकार को हिरासत में मेडिकल सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. हालांकि, इसके बाद अदालत ने बिना किसी के मामले की सुनवाई स्थगित कर दी.
