लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक के मुद्दे पर जोरदार बहस शुरू हुई। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली रोकने के उद्देश्य से पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक पेश किया, जिस पर सदन में करीब 10 घंटे चर्चा प्रस्तावित है।
चर्चा की शुरुआत केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक कोई नई समस्या नहीं है और पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान भी कई बड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए थे। उन्होंने दावा किया कि 2009 की रेलवे भर्ती परीक्षा, 2012 की एम्स परीक्षा समेत कई मामलों में प्रभावी कानूनी व्यवस्था का अभाव रहा। उनके अनुसार, देशभर में इस तरह की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने के लिए विशेष कानून की आवश्यकता है।
वहीं, विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है और एंटी पेपर लीक बिल सिर्फ दिखावे के लिए है। गोगोई ने आरोप लगाया कि 2024 में जिस कानून को ऐतिहासिक बताया गया था, अब उसी में संशोधन कर नया कानून पेश किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जिससे कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं। गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा सुधारों पर व्यापक चर्चा करने के बजाय सोशल मीडिया की राजनीति पर अधिक ध्यान दे रही है।
पेपर लीक को लेकर सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। सरकार जहां नए संशोधन को परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए जरूरी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे पुरानी व्यवस्था को नए नाम से पेश करने का प्रयास बता रहा है।
