चीन के तिब्बत से अचानक आए तेज पानी ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई मकान, बाजार और दूसरी संपत्तियां पानी की चपेट में आ गईं, जबकि तेज बहाव में वाहन और सामान बह गए। एक पुल के साथ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है।
हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की सूचना है। टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि 25 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। राहत और बचाव अभियान में 14 हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं।
ग्लेशियल झील फटने की आशंका
रसुवा में बीते 24 घंटे के दौरान बारिश बेहद कम हुई है। ऐसे में अधिकारियों को आशंका है कि तिब्बत में किसी ग्लेशियल झील के फटने यानी GLOF के कारण अचानक बड़ी मात्रा में पानी भोटेकोशी नदी में आया। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पानी किस ग्लेशियल झील से आया। इसके लिए सैटेलाइट तस्वीरों और तकनीकी जांच की मदद ली जा रही है।
ICIMOD-UNDP की 2020 की स्टडी के मुताबिक भोटेकोशी बेसिन में 122 ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लेशियल झील को रोकने वाली बर्फ, मिट्टी और पत्थरों की प्राकृतिक संरचना कमजोर होने पर झील का पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है, जिससे GLOF जैसी स्थिति बनती है।
हेलिपैड बहा, टिमुरे नहीं पहुंच सका हेलिकॉप्टर
टिमुरे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजा गया हेलिकॉप्टर भी प्रभावित इलाके में नहीं उतर सका। बाढ़ के पानी में स्थानीय हेलिपैड बह जाने के कारण पायलट को सुरक्षित लैंडिंग की जगह नहीं मिली और हेलिकॉप्टर काठमांडू लौट गया।
पायलट के मुताबिक, ऊपर से देखने पर टिमुरे का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा नजर आया। त्रिशूली नदी का जलस्तर भी बेहद तेजी से बढ़ा है।
प्रधानमंत्री ने सेना और सुरक्षाबलों को लगाया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की अतिरिक्त टीमें तैनात की जा रही हैं। साथ ही एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ को भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।
नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। रसुवा के अलावा नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन में भी त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है।
बिहार में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा
नेपाल में आई इस बाढ़ के बाद बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब 3 मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है। कोसी, बागमती और गंडक के कैचमेंट इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। NDRF और SDRF की अतिरिक्त टीमों को भी तैयार रखा गया है।
पिछले साल भी मची थी तबाही
भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है और आगे सुनकोशी नदी में मिलती है। यही नदी आगे चलकर सप्तकोशी यानी कोसी का रूप लेती है और बिहार में प्रवेश करती है।
पिछले साल भी भोटेकोशी में भीषण बाढ़ आई थी। उस दौरान 9 लोगों की मौत हुई थी और 24 लोग लापता हुए थे। नेपाल-चीन संपर्क का फ्रेंडशिप ब्रिज भी बाढ़ में बह गया था, जिससे दोनों देशों के बीच सड़क और व्यापारिक संपर्क लंबे समय तक प्रभावित रहा था।
