मुरादाबाद/अमरोहा। देवरिया में आयोजित जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर पत्रकारों से दुर्व्यवहार का आरोप लगाए जाने के बाद पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।
मुख्यमंत्री के मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताने वाले हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन (यूपीडब्ल्यूजेयू) के सचिव डॉ. संतोष गुप्ता ने कहा कि पत्रकारों को महज मंचों से मिलने वाले आश्वासनों या औपचारिक सम्मान के बजाय ठोस कानूनी सुरक्षा, व्यावहारिक अधिकार और निर्भीक माहौल की सख्त जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पत्रकार शासन और जनता के बीच सेतु बनकर भ्रष्टाचार उजागर करते हैं, तो जनप्रतिनिधियों की तर्ज पर फर्जी व दुर्भावनापूर्ण कार्रवाइयों से बचाने के लिए पत्रकारों को पारदर्शी कानूनी संरक्षण क्यों नहीं दिया जाता।
वहीं, जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के जिलाध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार महिपाल सिंह ने राजनीतिक दलों की उपेक्षात्मक नीति पर प्रहार करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद जिला स्तर के पत्रकारों के प्रति रवैया नहीं बदला है। उन्होंने लंबे समय से लंबित पेंशन सुविधा का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि जिले से लेकर तहसील और थानों तक तैनात अधिकारियों द्वारा सीयूजी फोन नंबर रिसीव न करना पत्रकारीय कार्यों में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। जनता के बेहिसाब टैक्स से मिलने वाले सीयूजी नंबरों पर अधिकारियों का यह रवैया सूचना के अधिकार और निष्पक्ष पत्रकारिता की आत्मा पर सीधा प्रहार है।
पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि कोरे भाषणों के बजाय सरकार पेंशन योजना को धरातल पर उतारे, सीयूजी कॉल उठाने की अनिवार्यता तय करे और व्यक्तिगत अपराध व जायज पत्रकारिता में फर्क करने वाला कड़ा कानून बनाए/INN
