अमरोहा,30 अगस्त। विमुक्त जाति दिवस पर गुर्जर समाज 143 जातियों को एससी में शामिल करने की मांग करेगा।
विमुक्त जाति संघर्ष से जुड़े नरेंद्र कटारिया ने रविवार को बताया कि विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जातियों को सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में समुचित हिस्सेदारी तथा संवैधानिक अधिकार दिलाने की मांग को लेकर हर साल की तरह गुर्जर समाज इस बार भी 31 अगस्त को विमुक्त जाति दिवस मनाएगा। समाज की ओर से प्रदेश के विभिन्न जिलों से महामहिम राष्ट्रपति को पत्र भेजे जाएंगे।
श्री कटारिया ने बताया कि गुर्जर समाज ने कैबिनेट मंत्री संजय निषाद द्वारा वंचित एवं विमुक्त समुदायों के अधिकारों को लेकर उठाई गई आवाज का समर्थन करते हुए कहा है कि दशकों से अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे समुदायों को उनकी सामाजिक स्थिति और जनसंख्या के अनुरूप न्यायसंगत हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि विमुक्त जाति दिवस हर वर्ष 31 अगस्त को मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश में इस वर्ष राज्यस्तरीय मुख्य कार्यक्रम मेरठ में आयोजित किया जा रहा है, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में भी विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जातियों के ऐतिहासिक योगदान, अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता के कार्यक्रम होंगे। गुर्जर समाजिक संगठनों का कहना है कि उक्त दिवस को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखकर इसे अधिकार और सामाजिक न्याय की आवाज बुलंद करने का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
विमुक्त जातियों के अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे मोहित तोमर ने रविवार को यहां सघन क्षेत्र में बताया कि आजादी के दशकों बाद भी विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों का बड़ा हिस्सा शिक्षा, रोजगार, आवास, आर्थिक अवसर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में पिछड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार को इन समुदायों की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराकर उनके लिए प्रभावी नीतियां बनानी चाहिए।
वहीं अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने कैबिनेट मंत्री संजय निषाद की उस मांग का समर्थन किया है, जिसमें गुर्जर, निषाद समेत 143 जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग से अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल करने की मांग उठाई गई है। समाज का कहना है कि जिन समुदायों को ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण वंचना का सामना करना पड़ा है, उन्हें संवैधानिक प्रावधानों के तहत न्यायसंगत अवसर और हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
हालांकि किसी जाति को अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने का अंतिम संवैधानिक अधिकार केंद्र स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है, इसलिए समाज की मांग को इसी रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
गुर्जर महासभा ने विमुक्त एवं संबंधित वंचित समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए विमुक्त जनजातियों के लिए 193 विधानसभा सीटें आरक्षित करने की मांग भी उठाई है। सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल आरक्षण की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि शिक्षा, रोजगार, प्रशासन और राजनीति में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। उसका तर्क है कि जिन समुदायों की आवाज लोकतांत्रिक संस्थाओं में पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रही है, उन्हें प्रतिनिधित्व का मजबूत अवसर मिलना चाहिए।
श्री तोमर ने यह भी कहा कि आरक्षण को किसी दूसरे वर्ग के अधिकारों के विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आरक्षण का उद्देश्य ऐतिहासिक वंचना को दूर कर समान अवसर उपलब्ध कराना है। इसलिए पहले उन समुदायों की स्थिति पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, जो लंबे समय से सामाजिक न्याय और समुचित हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं।
गुर्जर महासभा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विमुक्त एवं घुमंतू जातियों की लंबित मांगों पर निर्णायक पहल की अपेक्षा की है। समाज ने सरकार द्वारा इन समुदायों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले विमुक्त जाति दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घुमंतू जातियों के लिए विशेष बोर्ड गठित करने तथा आवास और कॉलोनी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में घोषणा की थी। अब आवश्यकता इन घोषणाओं को प्रभावी धरातल पर उतारने और अधिकारों से जुड़े व्यापक सवालों का स्थायी समाधान करने की है।
विमुक्त जाति दिवस के अवसर पर सौंपे जाने वाले ज्ञापन में 143 जातियों को एससी वर्ग में शामिल करने की मांग, विमुक्त-घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू जातियों के लिए प्रभावी संवैधानिक संरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने, 193 विधानसभा सीटों के आरक्षण, शिक्षा एवं रोजगार में हिस्सेदारी, सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण तथा विशेष कल्याणकारी योजनाएं लागू करने की मांग प्रमुख रहेगी। गुर्जर महासभा ने समाज के लोगों से बड़ी संख्या में कार्यक्रमों में शामिल होने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का आह्वान किया है/INN
