मुरादाबाद। मुगलपुरा में शनिवार को तिमंजिला भवन गिरने की घटना ने जहां पूरे शहर को झकझोर दिया है, वहीं दिल्ली रोड स्थित ग्रीन ऑर्किड सोसाइटी में रहने वाले करीब ढाई सौ परिवारों की चिंता और डर भी गहरा गया है। सोसाइटी के निवासियों का आरोप है कि लंबे समय से रखरखाव के अभाव, कथित तौर पर बिल्डर की मनमानी और भवन की लगातार बिगड़ती स्थिति के कारण यहां रहने वाले परिवारों की जिंदगी जोखिम में है।

निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो भविष्य में यहां भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उनका कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को अभी भवन की तकनीकी जांच कराकर आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि किसी अनहोनी से पहले लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

14 मंजिला इमारत की नींव को लेकर चिंता
ग्रीन ऑर्किड सोसाइटी की सबसे गंभीर समस्या भवन के बेसमेंट से जुड़ी बताई जा रही है। निवासियों के अनुसार बरसात के दौरान पानी बेसमेंट में झरने की तरह बहता हुआ दिखाई देता है। उनका आरोप है कि लगातार पानी का रिसाव भवन की संरचना और फाउंडेशन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

निवासियों का सवाल है कि यदि बारिश का पानी लगातार बेसमेंट में जमा होता रहे और भवन की नींव तथा अन्य संरचनात्मक हिस्सों पर इसका असर पड़ता रहे तो आने वाले समय में स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।

हालांकि भवन की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति का पता केवल विशेषज्ञों की तकनीकी जांच और स्ट्रक्चरल ऑडिट से ही चल सकता है। यही वजह है कि सोसाइटी के लोगों की मांग है कि प्रशासन तत्काल किसी सक्षम तकनीकी एजेंसी या विशेषज्ञों से भवन की जांच कराए और यह स्पष्ट करे कि इमारत पूरी तरह सुरक्षित है या उसमें किसी तरह का संरचनात्मक जोखिम मौजूद है।

खराब लिफ्ट बनी परेशानी का सबब
सोसाइटी में लिफ्ट की स्थिति भी लंबे समय से सवालों के घेरे में होने का आरोप लगाया जा रहा है। निवासियों का कहना है कि खराब लिफ्ट के कारण यहां कई बार हादसे हो चुके हैं और लोगों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ता है।
14 मंजिला इमारत में रहने वाले लोगों के लिए लिफ्ट महज सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत है। बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और बीमार लोगों के लिए लिफ्ट खराब होने की स्थिति में ऊपरी मंजिलों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।

निवासियों का आरोप है कि लिफ्ट की समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि यदि लिफ्ट की तकनीकी स्थिति खराब है तो उसकी विधिवत जांच और सुरक्षा प्रमाणन कराया जाना चाहिए।
‘बारूद के ढेर पर खड़े हैं ढाई सौ परिवार’
सोसाइटी के निवासियों ने अपनी मौजूदा स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा है कि वे खुद को “बारूद के ढेर पर खड़ा” महसूस कर रहे हैं।
उनका कहना है कि एक तरफ भवन की जर्जर होती स्थिति, दूसरी तरफ बेसमेंट में बारिश के पानी का रिसाव और तीसरी तरफ लिफ्ट की कथित खराबी—इन सबने मिलकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
सोसाइटी में रहने वाले परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी की कमाई लगाकर यहां घर खरीदा है। आज यदि भवन की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे अपने परिवार और बच्चों को लेकर कहां जाएं।
कई बार प्रदर्शन, फिर भी नहीं निकला स्थायी समाधान
निवासियों के मुताबिक सोसाइटी की समस्याएं नई नहीं हैं। इन समस्याओं को लेकर यहां रहने वाले लोग कई बार प्रदर्शन और विरोध दर्ज करा चुके हैं। संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार पक्षों के सामने अपनी समस्याएं रखी गई हैं।
इसके बावजूद उनका आरोप है कि अब तक ऐसा कोई व्यवस्थित और स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है जिससे उन्हें पूरी तरह आश्वस्त किया जा सके।
निवासियों का कहना है कि शिकायतों के बाद यदि केवल अस्थायी मरम्मत या खानापूर्ति की जाती है तो इससे समस्या का मूल समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि पूरी सोसाइटी की स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराया जाना चाहिए और जो भी कमियां सामने आएं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाना चाहिए।
मुगलपुरा हादसे के बाद बढ़ी चिंता
शनिवार को मुगलपुरा में तिमंजिला भवन गिरने की घटना के बाद ग्रीन ऑर्किड सोसाइटी के लोगों में भय का माहौल और गहरा गया है।
निवासियों का कहना है कि जब शहर में एक इमारत के अचानक गिरने की घटना सामने आ चुकी है, तब प्रशासन को उन भवनों की भी गंभीरता से जांच करनी चाहिए जिनके संबंध में लंबे समय से लोग शिकायतें कर रहे हैं।
ग्रीन ऑर्किड के लोगों का कहना है कि वे किसी हादसे का इंतजार नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि प्रशासन यदि अभी जांच कराकर आवश्यक कदम उठाता है तो संभावित दुर्घटना को टाला जा सकता है।
‘हादसे के बाद बिल्डिंग खाली कराने से बेहतर है अभी जांच’
सोसाइटी के निवासियों ने प्रशासन के सामने बेहद गंभीर सवाल रखा है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में भवन की स्थिति और खराब होती है तथा कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसके बाद नगर निगम और प्रशासन की टीम को मौके पर भेजकर लोगों से भवन खाली कराने की कार्रवाई करनी पड़ेगी।
ऐसी स्थिति में ढाई सौ परिवारों के सामने एक साथ अपना घर छोड़ने का संकट खड़ा हो जाएगा।
निवासियों का कहना है कि प्रशासन को हादसे का इंतजार करने के बजाय अभी विशेषज्ञों की टीम भेजकर पूरे भवन की जांच करानी चाहिए। यदि भवन सुरक्षित है तो लोगों को प्रमाणिक रूप से राहत मिलेगी और यदि कोई कमी है तो उसे समय रहते दूर कराया जा सकेगा।
‘एक हजार से ज्यादा लोगों के सिर से न छिने छत’
सोसाइटी के लोगों के मुताबिक यहां करीब 250 परिवार रहते हैं और इन परिवारों में एक हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। इन सभी लोगों की सुरक्षा सीधे तौर पर भवन की स्थिति से जुड़ी हुई है।
निवासियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि किसी तकनीकी जांच में भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया तो इन परिवारों के सामने वैकल्पिक आवास का संकट पैदा हो जाएगा।
उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी लगाकर फ्लैट खरीदे हैं। ऐसे में केवल भवन खाली कराने का आदेश समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रशासन को भवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ जिम्मेदार पक्ष की जवाबदेही भी तय करनी होगी।
निवासियों की गुहार – ‘हादसा होने से पहले जागिए’
ग्रीन ऑर्किड सोसाइटी के लोगों की प्रशासन से सीधी अपील है कि उनकी शिकायत को सामान्य शिकायत मानकर नजरअंदाज न किया जाए। उनका कहना है कि वे किसी दुर्घटना के बाद प्रशासनिक कार्रवाई नहीं चाहते, बल्कि उससे पहले समाधान चाहते हैं।
निवासियों का कहना है कि “कल अगर कोई बड़ा हादसा हो गया और उसके बाद नगर निगम व प्रशासन की टीम को बिल्डिंग खाली कराने के लिए भेजना पड़ा, तो उस समय बहुत देर हो चुकी होगी।”
उनकी मांग है कि प्रशासन अभी मौके पर पहुंचे, पूरे भवन का तकनीकी निरीक्षण कराए, स्थिति की वास्तविकता सामने लाए और जो भी सुधार जरूरी हों, उन्हें तत्काल कराया जाए।
क्योंकि मामला सिर्फ एक इमारत का नहीं, बल्कि ढाई सौ परिवारों और एक हजार से अधिक लोगों की सुरक्षा और उनके सिर पर मौजूद छत का है@शांतनु/INN
