मुरादाबाद। सोने के एक कड़े के गायब होने का मामला अब गंभीर आरोपों और जवाबी दावों के बीच उलझ गया है। बिजनौर के बढ़ापुर से भाजपा विधायक कुंवर सुशांत सिंह पर तीन युवकों को चोरी के शक में बंधक बनाकर बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि युवकों को रस्सियों से बांधकर उल्टा लटकाया गया, बेल्ट और डंडों से पिटाई की गई, जख्मों पर नमक रगड़ा गया और करंट के झटके तक दिए गए। दूसरी ओर, विधायक ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि तीनों युवकों ने आपस में ही झगड़ा किया था।

मामले ने शुक्रवार सुबह उस समय तूल पकड़ लिया, जब पीड़ितों के परिजन विधायक के आवास पर पहुंच गए। चार दिनों से अपने बेटों से मिलने के लिए भटक रहे परिवारों ने वहां हंगामा किया और पुलिस को शिकायत दी। परिजनों का आरोप है कि उन्हें काफी देर तक युवकों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाद में पता चला कि तीनों घायल हैं और काशीपुर के कृष्णा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
सोने का कड़ा गायब होने के बाद शुरू हुआ विवाद
डिलारी क्षेत्र की रहने वाली ओमवती कश्यप के मुताबिक, उनके पड़ोस में रहने वाले अतुल और रविश विधायक के आवास पर रोटी बनाने और झाड़ू लगाने का काम करते हैं। आरोप है कि विधायक के बेटे का सोने का कड़ा गायब होने के बाद दोनों युवकों से पूछताछ की गई।
ओमवती का दावा है कि अतुल और रविश ने कथित तौर पर कड़ा चोरी करके उनके छोटे बेटे रामू को देने की बात कही। इसके बाद रामू को भी पकड़कर रतूपुरा स्थित विधायक के आवास पर ले जाया गया।
रामू गांव में ही रहता है। वह कभी शादी-विवाह में हलवाई का काम करता है तो कभी मछलियां पकड़कर बाजार में बेचकर परिवार का गुजारा करता है। परिजनों के अनुसार, कड़े की तलाश में शुरू हुई पूछताछ के बाद तीनों युवकों के साथ कथित मारपीट की गई। हालांकि, कड़ा बरामद होने की बात सामने नहीं आई है।

उल्टा लटकाकर पिटाई और करंट देने का गंभीर आरोप
ओमवती कश्यप ने आरोप लगाया कि उनके बेटे रामू के साथ अतुल और रविश को भी रस्सियों से बांधकर उल्टा लटकाया गया। उनका दावा है कि विधायक ने खुद डंडों और बेल्ट से तीनों की पिटाई की, जबकि आवास पर मौजूद गार्डों ने भी मारपीट की।
परिजनों के मुताबिक, रामू के जख्मों पर नमक रगड़ा गया और उसे करंट भी लगाया गया। आरोप है कि पिटाई के दौरान रामू बेहोश हो गया, जिसके बाद उसे विधायक के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। ओमवती का यह भी कहना है कि होश में आने के बाद रामू के साथ फिर मारपीट की गई।
ये सभी आरोप पीड़ित पक्ष की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
चार दिन तक बेटे से मिलने के लिए भटकती रही मां
ओमवती का आरोप है कि रामू को ले जाए जाने के बाद परिवार के लोग लगातार विधायक के आवास के चक्कर काटते रहे, लेकिन उन्हें अपने बेटे से मिलने नहीं दिया गया। परिवार की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब आवास पर काम करने वाले एक रिश्तेदार ने कथित तौर पर उन्हें रामू की हालत गंभीर होने की जानकारी दी।
इसके बाद शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे ओमवती अपने रिश्तेदारों और गांव के लोगों के साथ विधायक के आवास पहुंचीं। वहां लोगों ने हंगामा किया और पुलिस को तहरीर दी। परिजनों के मुताबिक, इसके बाद उन्हें रामू से मिलने दिया गया।
रामू की हालत देखकर परिवार उसे काशीपुर के एक निजी अस्पताल ले गया, जहां उसका इलाज कराया जा रहा है। वहीं, अतुल और रविश के रतूपुरा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती होने की बात कही गई है। परिजनों का दावा है कि रामू के पूरे शरीर पर चोटों के गंभीर निशान हैं।
विधायक का जवाब- आरोप निराधार, तीनों ने आपस में किया झगड़ा
मामले में बढ़ापुर से भाजपा विधायक कुंवर सुशांत सिंह का पक्ष भी सामने आया है। दैनिक जागरण में प्रकाशित उनके बयान के मुताबिक, विधायक ने बंधक बनाकर पिटाई करने और करंट लगाने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
विधायक ने कहा, “बेटे ने हाथ में सोने का कड़ा पहना था। गायब होने पर दोनों नौकरों से जानकारी की गई। बंधक बनाकर पीटने व करंट लगाने के आरोप निराधार हैं। तीनों ने आपस में ही झगड़ा किया है।”
विधायक के इस बयान के बाद मामले में दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है। जहां परिजन तीनों युवकों को बंधक बनाकर यातना देने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विधायक का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।
अब यह जांच का विषय है कि युवकों को चोटें किन परिस्थितियों में आईं और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।
सीओ पर 20 लाख रुपये लेकर शिकायत से नाम हटाने का दबाव बनाने का आरोप
इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ओमवती कश्यप का आरोप है कि ठाकुरद्वारा के क्षेत्राधिकारी (सीओ) उन पर 20 लाख रुपये लेकर शिकायत से विधायक का नाम हटाने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सीओ विधायक के करीबी रिश्तेदार हैं।
परिजनों का कहना है कि शिकायत देने और सबूत होने का दावा करने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। हालांकि, रिश्वत और दबाव बनाए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में संबंधित अधिकारी का पक्ष और पुलिस की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
दोनों पक्षों में हो गया समझौता : एसपी देहात
एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि चोरी को लेकर पूछताछ किए जाने की शिकायत मिली थी। उनके मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच आपस में फैसला हो गया है।
पुलिस के इस बयान और परिजनों के गंभीर आरोपों के बीच कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ है, तो उसकी परिस्थितियां क्या थीं? क्या घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया? क्या परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों और पुलिस पर दबाव बनाने के दावों की जांच की गई?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
मामले में एक ओर बंधक बनाकर मारपीट, करंट देने और शिकायत से नाम हटाने के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप हैं, तो दूसरी ओर विधायक इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं। पुलिस की ओर से आपसी समझौते की बात कही गई है।
ऐसे में मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल में भर्ती किए जाने का रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। साथ ही, पुलिस पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है@जफर/INN
