चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अहम रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर नाराजगी जताई है। कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट से जुड़े चुनावी विवाद की सुनवाई के दौरान आयोग के वकील ने अदालत को बताया कि दोबारा मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था अपने ही रिकॉर्ड के गायब होने की बात कैसे कह सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को अगली सुनवाई में उपलब्ध सभी संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि जरूरी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए गए, तो चुनाव आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है और इस मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
क्या है शृंगेरी सीट का पूरा मामला?
कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर वर्ष 2023 में कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा ने बीजेपी के डीएन जीवराजा को 201 वोटों से हराया था। चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए जीवराजा ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी याचिका में डाक मतपत्रों की गिनती और खारिज किए गए मतपत्रों के सत्यापन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया था।
6 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने 279 खारिज डाक मतपत्रों का दोबारा सत्यापन करने और सभी डाक मतपत्रों की पुनर्गणना का आदेश दिया। इसके बाद मई में हुई दोबारा मतगणना में पहले वैध माने गए कांग्रेस प्रत्याशी के 255 डाक मतपत्र अमान्य कर दिए गए। संशोधित गणना के बाद बीजेपी के डीएन जीवराजा को 52 वोटों से विजेता घोषित किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने री-काउंटिंग के नतीजे पर लगाई रोक
दोबारा मतगणना के नतीजे को टीडी राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनकी ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट के आदेश के दायरे से बाहर जाकर पहले वैध घोषित किए गए मतपत्रों की भी दोबारा जांच की गई।
11 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए पुनर्गणना के परिणाम के प्रभाव पर रोक लगा दी और पहले वाली स्थिति बहाल करने का निर्देश दिया। इससे राजेगौड़ा फिलहाल विधायक के रूप में बहाल हुए।
अब मामले में दोबारा मतगणना की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई में रिकॉर्ड पेश करना आयोग के लिए अहम होगा। अदालत का रुख स्पष्ट है कि चुनावी विवादों में महत्वपूर्ण साक्ष्यों का सुरक्षित रहना और उनका उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
