मुरादाबाद। देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने वाले अधिवक्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला अब मुरादाबाद तक पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस के व्यवहार के विरोध में मुरादाबाद के अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर आवाज बुलंद की और प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
बुधवार को दी बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता एडवोकेट के नेतृत्व में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हुए। यहां उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से जुड़े वकीलों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने इस तरह की घटनाओं को न्यायिक व्यवस्था की गरिमा और अधिवक्ताओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
न्याय की आवाज उठाने वालों के सम्मान का मुद्दा
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि है। अधिवक्ता नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने संबंधित प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग उठाई।
इससे पहले मुरादाबाद में डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी की ओर से बार सभागार में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट परिसर और उसके आसपास अधिवक्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार तथा उन्हें न्यायिक कार्यों से संबंधित गतिविधियों में बाधा पहुंचाए जाने के आरोपों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने पूरे मामले पर गंभीर चिंता जताते हुए अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के अधिकार को महत्वपूर्ण बताया।
बार अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने उठाए सवाल
बार अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने कहा कि जब देश के सर्वोच्च न्यायालय में नागरिकों के संवैधानिक और मौलिक अधिकारों की रक्षा करने वाले अधिवक्ता ही सुरक्षित और सम्मानित महसूस नहीं करेंगे, तो आम नागरिकों के अधिकारों को लेकर भी सवाल खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को अपनी बात रखने और न्यायिक प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से योगदान देने का अवसर मिलना चाहिए। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ सभी के अधिकारों और सम्मान का संरक्षण भी आवश्यक है।
सभा का संचालन महासचिव कपिल गुप्ता ने किया। बैठक के बाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई।
बड़ी संख्या में अधिवक्ता रहे मौजूद
विरोध प्रदर्शन और बैठक में राकेश जोहरी, राममोहन श्रीवास्तव, सफदर अली, अंजार हुसैन, आवरण अग्रवाल, जितेंद्र प्रताप सिंह जेपी, रमा पांडे, रमेश बिश्नोई, हेमंत कौशिक, सुरेंद्र सिंह, आरिफ, आबिद अली, अभिनव गुप्ता, फिरोज आलम, पंकज शर्मा सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे।
अधिवक्ताओं के इस विरोध प्रदर्शन के जरिए स्पष्ट संदेश दिया गया कि अधिवक्ताओं के सम्मान, संवैधानिक अधिकारों और न्यायिक व्यवस्था की गरिमा से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अब अधिवक्ताओं की निगाहें प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर टिकी हैं@शांतनु/INN
