बसैली गांव में अनिश्चितकालीन धरना शुरू, किसानों में भारी आक्रोश
अमरोहा। भारतीय किसान यूनियन संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि “ज़मीनी पानी में ज़हर मत घोलो, हमारी फसलों और नस्लों को मत मारो।” उन्होंने गजरौला क्षेत्र में फैल रहे वायु और भूगर्भ जल प्रदूषण को मानव जीवन के लिए घातक बताते हुए इसके खिलाफ निर्णायक संघर्ष का आह्वान किया।

प्रदूषण से घिरे कई गांव, रहस्यमयी बीमारियों से मौतें
गजरौला ब्लॉक के बसैली, शहबाजपुर डोर, रसूलपुर, फाजलपुर गोसाईं और तिगरिया भूड़ गांवों में वायु और भूगर्भ जल के गंभीर प्रदूषण का असर सामने आ रहा है। स्थानीय ग्रामीण नबी अहमद के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं रहस्यमयी बीमारियों की चपेट में आकर असामयिक मौत का शिकार हो चुके हैं। कई मरीजों को चिकित्सकों द्वारा लाइलाज घोषित कर घर भेज दिया गया है।
प्रशासन से गुहार बेअसर, किसान संगठन से लगाई आस
ग्रामीणों ने जब जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अफसरों से गुहार लगाई तो कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित ग्रामीणों ने भारतीय किसान यूनियन संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी को अपनी पीड़ा बताई। किसान नेता ने किसानों की आवाज बुलंद करने का भरोसा दिलाया।

डीएम से मुलाकात, जांच के निर्देश
किसान नेता नरेश चौधरी ने जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स से मुलाकात कर प्रभावित गांवों में वायु व भूगर्भ जल की जांच कराने और गंभीर रोगियों की एम्स दिल्ली की विशेषज्ञ टीम से चिकित्सीय जांच कराने की मांग रखी। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल निगम की टीम को जांच के निर्देश दिए। टीम ने स्थलीय निरीक्षण कर पानी के नमूने लैब भेज दिए हैं।
एम्स की टीम न पहुंचने पर भड़का आक्रोश, धरना शुरू
एम्स दिल्ली की टीम के गांव न पहुंचने से आक्रोशित ग्रामीणों ने बसैली गांव में रविवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण शामिल हैं।

कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा, अजन्मे बच्चे भी असुरक्षित
धरनास्थल पर किसानों को संबोधित करते हुए नरेश चौधरी ने कहा कि वायु और भूगर्भ जल प्रदूषण से लोगों का जीवन नरक बन गया है। बच्चों में कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, गर्भ में पल रहे बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 18 वर्षीय शाइस्ता जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है, जबकि बीते दो वर्षों में लगभग दस ग्रामीणों की मौत रहस्यमयी बीमारी से हो चुकी है।
सरकार पर गंभीर आरोप, बताया संवैधानिक उल्लंघन
किसान नेता ने आरोप लगाया कि यह स्थिति जिम्मेदारों की “आपराधिक उदासीनता” का परिणाम है, जो सीधे तौर पर संविधान के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न संसद सत्र में प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा तक नहीं की गई, जबकि यह सूचीबद्ध विषय था।
प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर कार्रवाई की मांग
उन्होंने कहा कि रासायनिक औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ न तो कठोर कार्रवाई हुई, न उन्हें बंद किया गया और न ही हटाया गया। किसानों द्वारा अब तक जल प्रदूषण के खिलाफ कोई संगठित आंदोलन न हो पाना भी हालात बिगड़ने का कारण रहा है।
धरने में बड़ी संख्या में किसान नेता मौजूद
धरना प्रदर्शन में राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी, राष्ट्रीय मुख्य सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, जगदेव सिंह, जय करन सैनी, अंकुर चौधरी, चौधरी चरण सिंह, अब्दुल रशीद, दिलशाद मलिक, सुरेश सिंह, नबी चौधरी, मोनित कुमार, सुरेंद्र चौधरी, सुमर सिंह, नहीम चौधरी, इरशाद चौधरी, साइने आलम, लक्की चौधरी, विशाल यादव, हेरी लामा, पुनीत चौधरी, सहदेव यादव, आशु यादव सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
