सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच (CJI सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एजी मसीह) ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर उन्हें जमानत दी गई थी।
रिहाई नहीं होगी: कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि आरोपी को किसी भी स्थिति में जेल से रिहा नहीं किया जाए।
नोटिस जारी: अदालत ने कुलदीप सेंगर को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
CBI और पीड़िता की दलीलें
- भयावह अपराध: सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे “बेहद भयावह मामला” (Horrific case) करार दिया और कहा कि हाईकोर्ट ने सजा निलंबित करते समय अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज किया।
- लोक सेवक का तर्क: सीबीआई ने तर्क दिया कि सेंगर एक विधायक (लोक सेवक) थे, और उनके खिलाफ पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत कड़ी सजा की जरूरत है, न कि राहत की।
- सुरक्षा का खतरा: पीड़िता और उसके वकील ने कोर्ट में कहा कि सेंगर के बाहर आने से उनके परिवार की जान को खतरा हो सकता है।
कुलदीप सेंगर फिलहाल दो बड़ी सजाएं काट रहे हैं:
- नाबालिग से दुष्कर्म: इसमें उन्हें उम्रकैद की सजा मिली हुई है।
- पीड़िता के पिता की हत्या: पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में उन्हें 10 साल की जेल की सजा मिली है। चूंकि दूसरी सजा (10 साल वाली) में उन्हें अभी जमानत नहीं मिली है, इसलिए हाईकोर्ट के पिछले आदेश के बावजूद उनकी तत्काल रिहाई संभव नहीं थी।
विरोध और प्रतिक्रिया
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 23 दिसंबर 2025 को जमानत दिए जाने के बाद पीड़िता और उसकी माँ ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले पर आभार व्यक्त किया है।
