दिल्ली शिक्षा निदेशालय (DoE) ने 29 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी किया है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के अनुपालन में जारी किया गया है, जिसमें स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों को आवारा कुत्तों से मुक्त करने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने इस कार्य को ‘टॉप प्रायोरिटी’ (उच्च प्राथमिकता) पर रखा है ताकि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
शिक्षकों को सौंपी गई विशेष जिम्मेदारी
इस नए आदेश के तहत दिल्ली के सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। इन शिक्षकों का मुख्य कार्य स्कूल परिसर और उसके आसपास मौजूद आवारा कुत्तों की सटीक गिनती करना और उनका रिकॉर्ड रखना होगा। उन्हें यह भी रिपोर्ट देनी होगी कि ये कुत्ते छात्रों की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकते हैं।
सुरक्षा और फेंसिंग के कड़े निर्देश
सिर्फ गिनती ही नहीं, सरकार ने स्कूलों को अपने बुनियादी ढांचे में सुधार करने का भी निर्देश दिया है। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके परिसर की घेराबंदी (Fencing) कम से कम 6 फीट ऊंची हो, ताकि बाहरी कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा की जाएगी, जो एकत्रित डेटा को मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंचाएंगे।
शिक्षक संघों का कड़ा विरोध
दिल्ली सरकार के इस फैसले का शिक्षक संगठनों ने पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। शिक्षकों का तर्क है कि उनका प्राथमिक कार्य शिक्षण है और उन्हें ऐसे गैर-शैक्षणिक कार्यों (Non-teaching tasks) में लगाना शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि कुत्तों की गणना और प्रबंधन का काम नगर निगम (MCD) और पशुपालन विभाग का है, इसमें शिक्षकों को शामिल करना अनुचित है।
डेटा की कमी और समस्या का समाधान
दिल्ली में आवारा कुत्तों की पिछली आधिकारिक गणना 2016 में हुई थी, जिसके बाद से सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है। सरकार का मानना है कि इस व्यापक सर्वे से न केवल कुत्तों की वर्तमान संख्या का पता चलेगा, बल्कि नसबंदी और टीकाकरण जैसे कार्यक्रमों को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा। इसका अंतिम उद्देश्य बच्चों को ‘डॉग बाइट’ और रेबीज जैसे खतरों से बचाना है।
