गजरौला/अमरोहा। विकास और औद्योगीकरण के नाम पर धरती, पानी और हवा में घोले जा रहे ज़हर के खिलाफ गजरौला में किसानों का सब्र अब टूटता नजर आ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र गजरौला में रासायनिक कारखानों से छोड़े जा रहे जहरीले रासायनिक अपशिष्ट के विरोध में गांव शहबाजपुर डोर में चल रहा किसानों का बेमियादी धरना मंगलवार को दसवें दिन भी जारी रहा। किसानों ने साफ शब्दों में चेताया— अब जल-जंगल-जमीन से खिलवाड़ नहीं सहेंगे।
धरना स्थल पर भाकियू (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि विकसित राष्ट्र का सपना दिखाकर नदियों को नाले बनाया जा रहा है, जंगल उजाड़े जा रहे हैं और जमीन को कैमिकल से खोखला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” जैसे नारों की आड़ में पूरे जंगल साफ हो रहे हैं और एनजीटी के आदेशों की खुलेआम अवहेलना कर जमीन की संरचना से खिलवाड़ किया जा रहा है। यह सिर्फ किसानों का नहीं, आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का सवाल है। नरेश चौधरी ने भावुक अंदाज में कहा कि गजरौला की धरती चुप जरूर है, लेकिन उसकी पीड़ा बोल रही है—मुझे बचाओ, जहर में मत डुबोओ। उन्होंने चेताया कि यदि यही हाल रहा तो स्वच्छ हवा, पीने का पानी और उपजाऊ जमीन सिर्फ याद बनकर रह जाएंगे।

भाकियू (संयुक्त मोर्चा) के प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू ने कोविड महामारी का हवाला देते हुए कहा कि प्रकृति से छेड़छाड़ का अंजाम कितना भयावह हो सकता है, यह दुनिया देख चुकी है। उन्होंने दो टूक कहा कि धरती और पानी से खिलवाड़ करने वालों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। किसानों की माटी और जल की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है।
राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह ने तथाकथित विकास पर सवाल उठाते हुए कहा कि पर्वत, नदियां, तालाब और वृक्ष किसी भी सरकार या कॉरपोरेट से बड़े हैं। उन्होंने कहा कि केवल भूतकाल पर गर्व और भविष्य की अनदेखी विनाश को न्योता देने जैसा है। अगर आज चुप रहे तो कल पीने का पानी और साफ हवा के लिए तरसना पड़ेगा।

प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ भूजल की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन की है। धरने के दौरान किसानों ने ट्यूबवेल से निकल रहे प्रदूषित पानी की बोतलें राहगीरों को दिखाकर प्रशासन की नाकामी उजागर की और जनजागरण का आह्वान किया।
धरने में मनोहर लंबरदार, जगदेव सिंह, मलखान सिंह, हरज्ञान सिंह, गोपाल सिंह, रघबीर सिंह, यामीन, आस मोहम्मद, इरशाद, शानू चौधरी, अनुज, संजीव समेत बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
