शनिवार, 10 जनवरी 2026 को नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के मेरठ कूच के दौरान दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस के साथ उनकी भारी झड़प हुई। यह घटना मेरठ में एक दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण के विरोध में उनके वहां जाने की कोशिश के दौरान हुई।
मुख्य कारण (कपसाड़ गांव हत्याकांड): मेरठ के सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में गुरुवार को एक 50 वर्षीय दलित महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी जब वह अपनी बेटी को अपहरणकर्ताओं से बचाने की कोशिश कर रही थी। हमलावरों ने उसे धारदार हथियार से मारा और उसकी 20 वर्षीय बेटी का अपहरण कर फरार हो गए।
बॉर्डर पर तनाव: चंद्रशेखर आजाद शनिवार को पीड़ित परिवार से मिलने और न्याय की मांग करने के लिए मेरठ जा रहे थे। सुरक्षा कारणों और संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए, गाजियाबाद पुलिस ने उन्हें गाजीपुर बॉर्डर पर ही रोक दिया।
धक्का-मुक्की और झड़प: जब पुलिस ने सांसद के काफिले को रोका, तो उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई। बैरिकेड्स हटाने की कोशिश के दौरान पुलिस और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई।
सांसद की चेतावनी: चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और दोषियों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने प्रशासन से कहा, “वह पीड़ित परिवार की मां (मृतक महिला) सबकी मां है, और हम उनके सम्मान की रक्षा के लिए अंत तक लड़ेंगे”।
पुलिस की कार्रवाई: मेरठ पुलिस ने इस मामले में 10 टीमें गठित की हैं और दो मुख्य आरोपियों, पारस सोम और सुनील कुमार के खिलाफ हत्या, अपहरण और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी के दादा-दादी को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य फरार हैं।
वर्तमान स्थिति: मेरठ के कपसाड़ गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और अधिकारियों को स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है।
