नरेंद्र मोदी शनिवार को असम के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने देश की सामरिक तैयारियों और इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती देने वाले अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री सबसे पहले चाबुआ एयरफील्ड पहुंचे और वहां से वायुसेना के विमान के जरिए डिब्रूगढ़ के मोरन बाइपास पर तैयार विशेष इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का निरीक्षण करने पहुंचे।
डिब्रूगढ़ के पास तैयार यह खास एयरस्ट्रिप सामरिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। यह इलाका चीन सीमा से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे आपात परिस्थितियों में सैन्य गतिविधियों को तेजी से अंजाम दिया जा सकेगा। इस सुविधा को खासतौर पर भारतीय वायुसेना ने तैयार किया है, ताकि युद्ध, प्राकृतिक आपदा या किसी भी संकट की स्थिति में सैन्य और नागरिक विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ आसानी से हो सके।
प्रधानमंत्री की मौजूदगी में इस एयरस्ट्रिप पर लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य विमानों ने हवाई प्रदर्शन भी किया। हाईवे पर सीधे विमान उतरते और उड़ान भरते नजर आए, जिसने देश की रक्षा तैयारियों की झलक पेश की। करीब 40 मिनट तक चले इस एरियल शो में फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
इस दौरे के दौरान उन्होंने असम के विकास से जुड़े लगभग 5,450 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। बीते तीन महीनों में यह उनका तीसरा असम दौरा है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह दौरा अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। असम में वर्ष 2016 से लगातार दो बार एनडीए सरकार सत्ता में रही है, जबकि इससे पहले लंबे समय तक कांग्रेस का शासन था।
मोरन एयरस्ट्रिप राष्ट्रीय राजमार्ग के करीब 4.4 किलोमीटर लंबे हिस्से पर तैयार की गई है। यह देश की पहली ऐसी सुविधा है, जहां सामान्य यातायात के साथ जरूरत पड़ने पर सैन्य विमानों का संचालन भी किया जा सकेगा। डुअल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर की इस अवधारणा के तहत तैयार एयरस्ट्रिप भारी वजन वाले लड़ाकू और ट्रांसपोर्ट विमानों को संभालने में सक्षम है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में भारत की रणनीतिक ताकत और मजबूत होगी।
