अमरोहा। भाकियू संयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि नाईपुरा दूषित जल संकट केवल स्थानीय नहीं, बल्कि लोकतंत्र में चुप्पी की कीमत की चेतावनी है।
भारतीय किसान यूनियन भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के नाईपुरा-गजरौला क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट ने नाईपुरा समेत आसपास के गांवों के भूजल को बुरी तरह दूषित कर दिया है। पीला, बदबूदार और जहरीला पानी पीने से किसानों के परिवारों में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पीलापन, लगातार बुखार, शरीर में गांठें, उल्टी, सिरदर्द, थकान, वजन घटना, आंखों में सफेद चमक और रात में पसीना जैसे कैंसर जैसे गंभीर लक्षण दिख रहे हैं। ज़हरीले कारखानों से फसलें बर्बाद हो रही हैं, मौसम चक्र बिगड़ रहा है सर्दी से सीधे गर्मी?

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में शहबाजपुर डोर में किसानों का बेमियादी धरना 56वें दिन भी जारी है। किसानों का आरोप है कि यह प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सत्ता, पूंजी और चुप्पी के गठजोड़ की देन है। नमूने की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी ढुलमुल है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा, “जो कारखाना किसानों की रोजी-रोटी और सेहत छीने, वह किसान-विरोधी है फिर ऐसे में उनके हक़ में चुप्पी साधे शासन-प्रशासन और नेतागण किसान हितैषी कहां से हो गए? उन्होंने दोहराया कि इंडो-ट्रंप फ्रेमवर्क हो या दूषित जल इन मुद्दों पर गांव से सड़क तक लड़ाई जारी रहेगी, मिट्टी-पानी की रक्षा हर हाल में करेंगे।”

अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने इस मौके पर कहा कि किसान रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं साथ ही रियल-टाइम निगरानी वाली जल रक्षक टीमें तैनात हों, कारखानों पर सख्त दंड, नियमों का कड़ाई से पालन और दीर्घकालिक समाधान। प्रदूषण को राजनीति से निकालकर विज्ञान, तकनीक, जन-भागीदारी और नीति का विषय बनाया जाए। नाईपुरा को दूषित पानी से मुक्ति और सुरक्षा कवच चाहिए, ताकि बगद नदी निर्मल हो और आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ जल, सेहतमंद मिट्टी का गर्व कर सकें।नाईपुरा दूषित जल संकट केवल स्थानीय नहीं, बल्कि लोकतंत्र में चुप्पी की कीमत की चेतावनी है।

इस मौके पर मुख्य रूप से सुखराम सिंह, शान चौधरी, गंगाराम सिंह, हाजी नन्नू सैफी, मंसूर अली, मुमताज सैफी, समरपाल सैनी, ओम प्रकाश सिंह, शीशपाल सैनी, विजय सिंह, रामप्रसाद, सोमपाल सिंह, होमपाल सिंह, हरिद्वार सिंह समेत तमाम किसान जत्थेबंदियों ने हर ज़ोर ज़ुल्म के संघर्ष में अपने संकल्प को दोहराया।
