एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है, जिससे वह अपनी भतीजी की शादी में शामिल हो सकेंगे। अदालत ने उन्हें 18 मार्च तक के लिए राहत दी है।
1.5 करोड़ जमा करने के बाद मिली राहत
कोर्ट ने जमानत देने से पहले राजपाल यादव के वकील को 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का निर्देश दिया था। अदालत ने साफ कहा था कि तय समय तक रकम जमा होने पर ही रिहाई संभव होगी। वकील द्वारा समय सीमा के अंदर डीडी जमा करने के बाद अभिनेता को शादी में शामिल होने के लिए शाहजहांपुर जाने की अनुमति मिल गई। हालांकि, अदालत ने उनका पासपोर्ट जमा कराने का आदेश भी दिया है।
पहले कोर्ट ने लगाई थी फटकार
इससे पहले 12 फरवरी को हुई सुनवाई में अदालत ने राजपाल यादव को कड़ी चेतावनी दी थी। कोर्ट ने कहा था कि कानून से ऊपर कोई नहीं होता और पहले दिए गए आदेशों का पालन न करना गंभीर बात है। उस समय अभिनेता की तरफ से परिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जमानत की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने सुनवाई टाल दी थी।
5 फरवरी को किया था सरेंडर
फिल्म भूल भुलैया से पहचान बनाने वाले राजपाल यादव ने 5 फरवरी को तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था। सरेंडर से पहले उन्होंने आर्थिक परेशानी का हवाला दिया था। इस बयान के सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया।
बताया गया कि सलमान खान, सोनू सूद, अजय देवगन, वरुण धवन और डेविड धवन समेत कई लोगों ने आर्थिक मदद की। वहीं सिंगर मीका सिंह ने भी 11 लाख रुपये की सहायता दी और अन्य लोगों से आगे आने की अपील की।
पत्नी ने इंडस्ट्री का जताया आभार
राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव ने पीटीआई से बातचीत में फिल्म इंडस्ट्री और सहयोग करने वालों का धन्यवाद किया। बताया जा रहा है कि ब्याज और जुर्माने सहित कुल बकाया राशि करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 2010 में बनी फिल्म अता पता लापता से जुड़ा है। आरोप है कि फिल्म बनाने के लिए राजपाल यादव ने एक कंपनी से 5 करोड़ रुपये उधार लिए थे। फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह रकम वापस नहीं कर पाए। शिकायतकर्ता को दिए गए कई चेक बाउंस होने के बाद अदालत ने 2018 में उन्हें और उनकी पत्नी को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी।
बाद में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया, हालांकि बाद में हाई कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी। लेकिन भुगतान में देरी और वादे पूरे न होने के कारण अदालत ने दोबारा सरेंडर करने का आदेश दिया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।
