अमरोहा। अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र में दूषित जल की समस्या एक गंभीर संकट के रूप में उभरी है। नाईपुरा समेत आसपास के कई गांवों में रासायनिक कारखानों के जहरीले अपशिष्ट से भूजल पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिससे जलस्रोत अवरुद्ध हो गए हैं। यह संकट न केवल पर्यावरणीय, बल्कि लैंगिक और सामाजिक स्तर पर भी गहरा है। प्रकृति की सरलता के आगे मानवीय विद्वत्ता बौनी साबित हो रही है, जहां पानी की नियति अन्योन्याश्रित है।
पुरुष मुख्यतः सिंचाई और पशुपालन जैसे कार्यों में लगे रहते हैं, जबकि महिलाएं हर लीटर पानी को बच्चों, रसोई, बीमार बुजुर्गों और पालतू पशुओं के लिए सहेजने की जिम्मेदारी निभाती हैं। दूषित पानी से असाध्य बीमारियां, फसलों की बर्बादी और दुधारू पशुओं की मौत जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे ग्रामीण जीवन प्रभावित है।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में शहबाजपुर डोर पर किसान पिछले 71 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हुए हैं। प्रदूषण के खिलाफ यह आंदोलन तेज होता जा रहा है, जिसमें फैक्ट्रियों के पुतले फूंके जा चुके हैं और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है।
प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने कहा कि गजरौला के रासायनिक कारखाने भूजल और बगद नदी को जहरीला बना रहे हैं। जांच रिपोर्ट दबाई जा रही है, लेकिन किसान न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे।
अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा जांच कमेटी गठित की गई है, पर रिपोर्ट और कार्रवाई में देरी से किसान आक्रोशित हैं। उन्होंने सीएसआर फंड के उचित उपयोग और दूषित जल से मुक्ति की मांग दोहराई। किसान चेतावनी दे रहे हैं कि यदि साफ पानी नहीं मिला तो आंदोलन और तेज होगा। यह मुद्दा अब केवल जल संकट नहीं, बल्कि जीवन-मरण का प्रश्न बन चुका है।

इस अवसर पर गंगाराम, होमपाल सिंह, प्रेमचंद, समरपाल, विजय सिंह, राम प्रसाद, मंसूर अली, विजय, रोशन गणपत, सुरेश, सुखे, ओमप्रकाश, नन्नू सैफी, प्रकाश सैनी, रामसरन, सतीराम, अशद अली समेत इलाके के अन्य गांवों के किसान मौजूद रहे |
